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Aligarh News: जिंदा बच्चे, फिर भी घर नहीं ...वृद्धाश्रम में सिमटती जिंदगी

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असदपुर कयाम स्थित वृद्धाश्रम। - फोटो : samvad
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बच्चों के जीवित रहते हुए भी बुजुर्गों की जिंदगी वृद्धाश्रमों में सिमट कर रह गई है। उम्र के आखिरी पड़ाव में बच्चे माता-पिता को अपने साथ रखने को तैयार नहीं हैं। जिले के चार वृद्धाश्रमों की दीवारों के भीतर 137 बुजुर्ग महिला-पुरुषों की चुप्पी रिश्तों की बदलती तस्वीर बयां कर रही है। विश्व परिवार दिवस पर की गई बातचीत में उनका दर्द झलक आया।
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केस - एक

कासगंज के मंडी बाजार के रहने वाले 65 वर्षीय जयवीर सिंह कहते हैं जिन दो बच्चों को चलना सिखाया, पढ़ाया-लिखाया और उनकी जिंदगी संवारने में अपनी पूरी उम्र लगा दी, उन्होंने ही उम्र के अंतिम पड़ाव पर अकेले जिंदगी बिताने को मजबूर कर दिया।

केस - दो

शहर के घनश्यामपुरी के 62 वर्षीय भूषण बत्रा कहते हैं कि उनका एक बेटा व एक बेटी है। बेटी की शादी के बाद मकान बेटे के नाम कर दिया। इसके बाद बेटे-बहू का व्यवहार बदल गया। रोज के विवाद से तंग आकर वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हो गए।
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केस - तीन

विजयगढ़ की 64 वर्षीय शकुंतला बताती हैं कि पति के निधन व दोनों बेटियों की शादी होने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने संपत्ति को लेकर क्लेश करनी शुरू कर दी। खुद के अकेलेपन के चलते उन्हें आश्रम आना पड़ा। परिवार के लोग कभी हालचाल पूछने भी नहीं आते।



केस - चार

हरदुआगंज की तुलसा देवी बताती हैं कि उनकी तीन बेटियां व दो बेटे हैं। दोनों बेटे अच्छी नौकरी में हैं, लेकिन बहुओं से अनबन के बाद बेटों ने अलग रहने की सलाह दे दी। इसके बाद उन्हें घर छोड़ना पड़ा। पिछले डेढ़ महीने से ओल्ड एज होम में रह रही हैं।



पिछले पांच साल में ऐसे मामले बढ़े

श्री दाऊजी सेवाधाम वृद्धाश्रम असदपुर कयाम के प्रबंधक मोनू शर्मा के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां बच्चे नौकरी, निजी जीवन या पारिवारिक विवादों का हवाला देकर बुजुर्गों को साथ रखने से इनकार कर देते हैं। कुछेक बुजुर्गों को महीने का खर्च भेज दिया जाता है, लेकिन भावनात्मक साथ नहीं मिलता। मानव सर्व कल्याण सेवा संस्थान की सचिव नेहा पंडित एडवोकेट का कहना है कि पहले यहां अधिकतर निराश्रित या अकेले बुजुर्ग आते थे, लेकिन अब ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जहां बच्चे होने के बावजूद माता-पिता आश्रम में रह रहे हैं।




प्रशासन तक पहुंच रहीं शिकायतें

जिला समाज कल्याण अधिकारी विनीत कुमार मलिक के अनुसार पिछले ही दिनों जनसुनवाई में एक बुजुर्ग दंपती ने शिकायत दर्ज कराई कि बेटा मकान अपने नाम कराने के बाद उन्हें प्रताड़ित कर रहा है। इस पर प्रशासन ने मामले में नोटिस जारी कर सुनवाई शुरू की है। अगर समाधान नहीं होता तो कार्रवाई की जाएगी।
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