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18 मुकदमों में एफआर के बाद समन, किसान जाएंगे हाईकोर्ट

Mon, 17 Apr 2017 01:03 AM IST
आशीष श्रीवास्तव
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टप्पल टाउनशिप का भूमि अधिग्रहण का मसला सुलझता नजर नहीं आ रहा है। उच्च न्यायालय का फैसला जेपी ग्रुप के पक्ष में आने के बाद उसने भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी है तो दूसरी तरफ जमीन जोतने संबंधी 18 मुकदमों में एफआर (अंतिम रिपोर्ट) के बावजूद 225 के करीब किसानों के खिलाफ समन जारी होने की कार्रवाई ने आग में घी का काम किया है। इससे नाराज किसान भूमि अधिग्रहण बिल का हवाला देते हुए चार गुने मुआवजा दिलाने और मुकदमे वापसी की जिद पर अड़े हैं और इसके लिए दोबारा से हाईकोर्ट जाने अथवा रिव्यू कराने के प्रयास में हैं। इधर भाजपा नेत्री शशि सिंह की मांग पर प्रशासन ने दोबारा से तीन दिन का समय मांग लिया है। 
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यह है प्रकरण 
वर्ष 20009-10 में यमुना एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद जेपी ग्रुप टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण की कोशिश में था। पहले चरण में टाउनशिप के लिए करीब 500 हेक्टेयर भूमि तथा दूसरे चरण में करीब 390 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण भी हो चुका था, लेकिन बची टप्पल, जिकरपुर, जहानगढ़, कृपालपुर एवं कंसेरा की 110 हेक्टेयर भूमि के स्वामी 270 किसान नोएडा के बराबर मुआवजे पर अड़ गए।
भूमि अधिग्रहण व कम मुआवजे के विरोध में टप्पल में आंदोलन हुआ। इसी दौरान हिंसा में पीएसीकर्मी सहित चार लोग मारे गए। इसके बाद कई बड़े किसान नेताओं के साथ 61 किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें बाद में एफआर लगी। 
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इन 18 मुकदमों में आ रहे समन
इसके बाद जब माहौल सामान्य हुआ तो उन किसानों ने अपनी जमीनें जोतना शुरू कर दीं, जिन्होंने अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। 110 हेक्टेयर भूमि के यह करीब 270 किसान रहे होंगे। इन पर जेपी ने 18 मुकदमे दर्ज कराए।
इसे लेकर विवाद बढ़ा तो तय हुआ कि न किसान जमीन जोतेंगे और न जेपी कोई काम करेगा। मुकदमे एफआर होंगे। बाद में मुकदमे एफआर भी हुए, मगर हाईकोर्ट में जेपी ग्रुप की ओर से इन 18 मुकदमों की एफआर पर विरोध दर्ज कराया गया, जिसके चलते अदालत ने इन 18 मुकदमों से जुड़े करीब 225 किसानों को समन जारी किए हैं।
यहां से आया केस में नया मोड़
 मामला चलता रहा और इसमें नया मोड़ तब आया जब यूपीए सरकार ने जाते-जाते साल 2014 में भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन कर ग्रामीण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण पर किसानों को चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया।
इसके बाद किसान अपनी फसलों के साथ चार गुना मुआवजा दिलाने पर अड़ गए, जबकि जेपी ग्रुप तीन गुने मुआवजे के साथ परिसंपत्तियों का मुआवजे देने के अपने पुराने प्रस्ताव पर अड़ा था। मामला गृहमंत्री राजनाथ तक भी पहुंचा, लेकिन भाजपा सरकार ने किसानों की एक न सुनी।  
अवार्ड घोषणा से मिली मांग को नई धार 
साल 2014 में प्रशासन ने उक्त भूमि को अवार्ड घोषित कर दिया। अवार्ड घोषणा के आधार पर किसान वर्तमान सर्किल रेटों के चार गुने मुआवजे की मांग करने लगे, जबकि प्रशासन और जेपी ग्रुप साल 2009-10 के रेटों पर मुआवजा देने पर आमादा थे। उपरोक्त गांवों के करीब 20 हेक्टेयर भूमि के किसान सहमत हो गए, लेकिन 90 हेक्टेयर भूमि के करीब 200 किसान अभी भी असहमत हैं। 

किसानों की मांग है कि भले ही हमारी जमीन आखिरी कौने में डाल दी जाए, लेकिन फसलों के साथ हमें चार गुने रेटों पर ही मुआवजा मिले। अन्यथा की स्थिति में हम हाईकोर्ट का पुन: दरवाजा खटखटाते हुए केस का रिव्यू कराएंगे। डीएम से वार्ता करने पर उन्होंने केस पर विचार के लिए दोबारा से तीन दिन का समय मांगा है।
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- शशि सिंह, भाजपा की पूर्व लोकसभा प्रभारी




 
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