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त्रिकोणीय मुकाबले को सुधीर ने बना दिया दिलचस्प

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आशीष निगम, अलीगढ़।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सबसे चर्चित जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर बहुमत जुटाना शुरू हो गया है। भाजपा, बसपा, सपा-महान दल की त्रिकोणीय टक्कर को निर्दलीय गुट से पूर्व जिपं अध्यक्ष चौ. सुधीर सिंह के खेमे ने दिलचस्प बना दिया है। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले सभी 608 प्रत्याशियों को अब नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। कल मतगणना होगी और शाम तक तस्वीर कुछ हद तक साफ हो चुकी होगी।
नतीजों के साथ ही कई जिला पंचायत सदस्यों के गायब होने की संभावना बढ़ गई है, जो इस मौके में बेहतर ‘समर्थन मूल्य’ लेकर किसी को भी मजबूत कर सकते हैं, क्योंकि ये चुनाव पार्टियों के चिन्ह पर नहीं होता है। इसलिए कोई भी किसी के भी साथ जा सकता है। ऐसे में सभी की नजरें निर्दलीयों पर टिकी हैं। किसी तरह से बहुमत जुट सके। जिला पंचायत के सदन में इस बार 52 की जगह 47 सदस्य पहुंचेंगे, जिसमें 27 सदस्यों का समर्थन जुटाने वाला ही अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेगा।
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27 का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए भाजपाइयों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। कारण ये कि पूर्व सीएम कल्याण सिंह की रिश्तेदार एवं एटा सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ की समधन विजय देवी भाजपा से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सशक्त दावेदार मानी जा रही हैं।
एमएलसी ठा. जयवीर सिंह को भाजपा में शामिल कराने में एटा सांसद की अहम भूमिका थी। इसलिए जयवीर सिंह की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। अभी तक जिला पंचायत की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले पूर्व कबीना मंत्री एवं वर्तमान भाजपा एमएलसी ठा. जयवीर सिंह इस बार पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं।
बीते 15 वर्ष से जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा रहे एमएलसी ठा. जयवीर सिंह की मजबूत पकड़ से बाकी दल वाले अंदरखाने परेशान हैं। भाजपा ने सभी 47 सीटों पर अपने समर्थित प्रत्याशी उतारे हैं, अब कितने विजयी होंगे। ये कल सामने आएगा।
इधर, दूसरे नंबर पर सर्वाधिक प्रत्याशियों वाली बसपा के सामने जिला पंचायत की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। पूर्व में तो एमएलसी जयवीर सिंह बसपाई थे, इसलिए पार्टी को जिला पंचायत अध्यक्ष मिलता था। अब उनके भाजपाई बनने से बसपा के सामने अपना अध्यक्ष बनाना बड़ी बात होगी।
इधर, भाजपा-बसपा की टक्कर में सपा-महान दल अपनी स्थिति मजबूत बता रहा है। वर्ष 2015 के जिला पंचायत चुनाव में सपा से पूर्व विधायक ठा. राकेश सिंह की पत्नी डा. नीतू सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदार थीं लेकिन वह बहुमत नहीं जुटा सकी थीं।
अब सपा के पास वर्ष 2015 का बदला लेने का मौका है। पार्टी से अध्यक्ष पद की दावेदार अर्चना यादव का गुट भी आक्रामक है। इन तीन पार्टियों के त्रिकोणीय मुकाबले में निर्दलीय गुट से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह का खेमा भी सक्रिय है।
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ये खेमा निर्दलीयों को साथ लेकर इस खेल में उलटफेर करने में ताकत लगा रहा है। इस गुट से चौ. सुधीर सिंह दोबारा से अध्यक्ष पद के दावेदार हो सकते हैं। वर्ष 2017 में तत्कालीन जिपं अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर चर्चा में आए नरेंद्र इस बार चुनावी परिदृश्य से फिलहाल गायब हैं।
1-निर्दलीय 409
2-भाजपा 47
3-बसपा 42
4-सपा एवं महान दल 36
5-रालोद 26
6-कांग्रेस 24
7-आप 14
8-प्रसपा 10
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