प्रारंभिक रुझानों से यह भी पता चला है कि कुछ वन्य जातियां ऐसी भी हैं जिनकी संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें मुख्य रूप से नीलगाय और ब्लैक बक (काला हिरण) शामिल हैं। महज 10 साल पहले इनकी संख्या 250 से 350 के आसपास थी जो अब 2250 तक पहुंच गई है। नीलगाय का आंकड़ा जुटाया जा रहा है।
पक्षियों की स्थिति चिंताजनक
वन्य जीवों के साथ-साथ पक्षियों की संख्या पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भाट तीतर अब गंगा और यमुना के खादर में नहीं पाया जाता। इसी तरह, काला तीतर और हुदहुद (हूप) जैसे पक्षियों की संख्या भी काफी कम हुई है।
क्यों आया है यह बदलाव
प्रो. अफीफउल्लाह कहते हैं अलीगढ़ में कभी वन क्षेत्र नहीं रहा। कभी पिसावा में थोड़ा वन क्षेत्र था, अब वह भी नहीं है। एक शताब्दी में नदियां भी विलुप्त हुईं। ईशन नदी, सेंगर नदी, नीम नदी जैसी नदियां विलुप्त हुईं। काली नदी भी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। इसका भी प्रभाव वन्य जीवन पर पड़ा है। इसके साथ ही ऊसर भूमि भी कम हुई है।