प्रधानमंत्री की स्टार्ट अप इंडिया योजना में बीते चार वर्ष में 40 लाख की आबादी वाले अलीगढ़ में कोई भी दस करोड़ी आइडिया नहीं आया। बीती 4 फरवरी को जब अमर उजाला के पहले पेज पर ये खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई तो मदन मोहन शर्मा का लंबा संघर्ष एक नये आविष्कार के साथ सामने आया। उन्होंने दस वर्ष में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च कर एक्सीडेंट से बचाने का नया एक सिस्टम बनाया है। इसका पेटेंट आस्ट्रेलिया सरकार ने बीस वर्ष के लिए दिया है। ये सिस्टम एक्सीडेंट के दौरान होने वाली जन धन हानि को बहुत हद तक कम कर देता है। आस्ट्रेलिया ने तो उनकी इस खोज को हाथोंहाथ लेकर उनको बीस वर्ष के लिए पेंटेट दिया लेकिन स्थानीय जिला उद्योग केंद्र ने उनके प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जी हां, स्टार्ट अप इंडिया योजना की कड़वी सच्चाई यही है। शायद, इसीलिए ये योजना फ ाइलों और सरकारी प्रचार तक सिमटती जा रही है।
चाचा-चाची की मौत ने आविष्कार कराया
अलीगढ़। मदन मोहन शर्मा के सगे चाचा रामनिवास शर्मा और चाची रामकली की वर्ष 2008 में नरौरा के पास सड़क हादसे में मौके पर ही मौत हो गई थी। कार में सवार चार अन्य परिजन भी घायल हो गए थे। इससे मदन को गहरा धक्का लगा। इसी दर्दनाक घटना के बाद एमएससी भौतिक विज्ञान से पास करने वाले मदन मोहन ने नया आविष्कार करने की ठान ली। वर्ष 2009 से उन्होंने इस पर काम शुरू कर दिया। लंबे संघर्ष और मोटे खर्च के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने पूरा सिस्टम बना लिया और वाहनों में लगाकर इसका प्रयोग शुरू कर दिया। ट्रक, बस और कार में ये सिस्टम लगाया गया। फिर इस सिस्टम से लैस अनाज से लदे ट्रक का एक्सीडेंट 2017 में डिबाई के शिकारपुर के पास हुआ था। जिसमें कोई नुकसान नहीं हुआ। अनाज से लदा ये ट्रक ड्राइवर की आंख झपकने से एक पेड़ से टकरा गया था।
कैसे काम करता है सिस्टम
अलीगढ़। व्हीकल मित्र नाम का ये सिस्टम वाहन के आगे के बंपर के अंदर या बाहर लगाया जाता है। जिसमें बंपर की पूरी फ्रं ट साइड के साथ लोहे की हैवी ग्रिल लगती है। इस ग्रिल के साथ दो हैवी ड्यूटी शॉक अब्जार्वर अंदर की ओर जुड़े होते हैं, जिनको ब्रेक से जोड़ा जाता है। किसी भी चीज या वाहन से टकराते ही सिस्टम नैनो सेकंड से भी कम समय में काम करता है। टक्कर के लगते ही ग्रिल से जुड़े शॉक अब्जार्वर उसकी टक्कर की ऊर्जा को जब्त कर कम कर देते है और बाकी ऊर्जा को पीछे ब्रेक पर डाल कर ब्रेक लगा देते हैं। तुरंत ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाता है, जिससे वाहन जहां का तहां खड़ा हो जाता है। अगर ड्राइवर सो भी जाए तो वाहन में सवार लोगों को कम से कम क्षति होती है। वाहन सुरक्षित रहता है। कार में लगवाने में इसका खर्च 25 हजार तो बड़े वाहनों में एक लाख तक आता है, लेकिन बड़ी संख्या में उत्पादन हो तो इसकी कीमत कम हो जाएगी।
आस्ट्रेलिया ने दिया 20 वर्ष का दिया पेटेंट
अलीगढ़। मदन मोहन कहते हैं देश में सालाना सवा दो लाख से अधिक सड़क हादसे होते हैं। जिसमें लाखों लोगों की मौत हो जाती है और करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। हादसों को रोकने के लिए ये उनका प्रयास है। अब सरकार से आर्थिक मदद मिले तो इसका व्यापक प्रयोग वाहनों में हो और जनधन हानि बचाई जाए। आस्ट्रेलिया की सरकार से 22 नवंबर 2018 से उनको इसका पेटेंट 2014362921 नंबर से मिला है जो बीस वर्ष के लिए मान्य है। उन्होंने इसके आगे के विस्तार के लिए मदन इंड टेक्नोलाजिस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बीती 23 जनवरी 2019 को बनाई है। अब वह चाहते हैं कि स्टार्ट अप इंडिया में इसको शामिल कर बड़ी संख्या में वाहनों में प्रयोग किया जाए। अब तक वह अपने घर से खुद इसमें एक करोड़ से अधिक खर्च कर चुके हैं।
आनलाइन करें स्टार्ट अप आवेदन
अलीगढ़। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि उक्त प्रकरण में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 25 लाख का आवेदन ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स में गया था लेकिन मदन मोहन ने बाद में किसी कारणवश आपत्ति दर्ज कराई तो आवेदन लंबित हो गया। अगर वह स्टार्टअप में आवेदन करना चाहते हैं तो आनलाइन कर सकते हैं।