क्षेत्र के गांव अंडला के अस्पताल में बिजली है न पानी। अस्पताल खुले हुए 14 साल हो गए पर दोनों मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी नहीं होता है। शौचालयों में कबाड़ भरा हुआ है और गंदगी व्याप्त है।
तहसील क्षेत्र के गांव अंडला में सन 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार में सिंचाई मंत्री रहे जयवीर सिंह ने अंडला पीएचसी का उद्घाटन किया था, जब से अब तक 14 साल के लंबे अंतराल से अस्पताल बिजली के लिए तरस रहा है, किसी सरकार ने विद्युत कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया है।
बिना बिजली के पानी की सुविधा नहीं हो सकी है, स्टैंड बना हुआ है लेकिन पानी की टंकी नहीं है। अस्पताल बनने पर पानी की टंकी रखी गई थी लेकिन पानी भरने का साधन नहीं होने के बाद प्लास्टिक की टंकी आंधी में गिरकर टूट गई थी। इसके कारण पेयजल और शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं है। दूरदराज़ से आईं महिला मरीज भी अस्पताल के आसपास खुले में शौच एवं लघुशंका के लिए जाती हैं।
बिना बिजली के कई दवाइयां ऐसी हैं जो अस्पताल पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकती हैं, उन्हें फ्रिज में ही स्टोर किया जाता है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण नहीं हो पाता है। लेबर रूम बनाया है लेकिन प्रसव की सुविधा नहीं मिल पाती है। शौचालयों का बुरा हाल है, किसी में खाली डब्बे रखे हैं तो किसी में किवाड़ रख दी गई हैं। परिसर की चहारदीवारी छोटी है और एक छोटा गेट हमेशा खुला रहता है, जिसके चलते हैंडपंप पर शराबियों का जमावड़ा अस्पताल बंद होते ही देर रात तक रहता है।
सरोज वर्मा (एएनएम एचवी) का कहना है कि महीने में एक रविवार को सीएचसी मंडल पर स्वास्थ्य मेला लगता है, जिसके अंतर्गत मेरी ड्यूटी निश्चित है किंतु विद्युत व्यवस्था न होने के कारण गर्भवती महिलाओं के लिए टीके यहां उपलब्ध नहीं है। बिना फ्रिज के उन्हें स्टोर नहीं किया जा सकता। टीकाकरण के लिए गर्भवती महिलाओं को खैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है।
अंडला पीएचसी में बिजली व्यवस्था कुछ समय से बाधित है, काफी दूर स्थित एक नलकूप से विद्युत तार टूटने से समस्या पैदा हुई है। बिजली का कनेक्शन छह-सात साल पहले हो चुका है। इसकी वजह से पानी का संकट हो सकता है। अस्पताल में मरीजों को दवा वितरित की जा रही हैं। स्वास्थ्य मेले में गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी होता है। डॉ. नीरज त्यागी, मुख्य चिकित्साधिकारी अलीगढ़
अंडला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कभी भी विद्युत कनेक्शन नहीं रहा है। रोहित यादव, जूनियर इंजीनियर खैर विद्युत सब स्टेशन।
एक नजर में
20 गांव जुड़े हुए हैं अंडला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से
50 हजार की आबादी इस अस्पताल के क्षेत्र में आती है
03 लोगों का स्टाफ है, डाक्टर, फार्मासिस्ट और एलटी
10 किलोमीटर दूर खैर सीएचसी में जाना पड़ता है मरीजों को
बोले मरीज और तीमारदार
मैं पत्नी को दवा दिलाने आया हूं स्टॉफ तो मौजूद है किंतु बिना व्यवस्था चिकित्सा प्रभावित हो रही हैं। हमें 10 किलोमीटर दूर खैर अथवा किसी निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। विजय पाल शर्मा खेरिया झल्लू
मुझे खांसी और सीने में दर्द था मुझे पहले सिर्फ गोली दी गई काफी कहने के बाद पीएससी अंडला पर सिरप दिया गया है दवा होने के बावजूद भी दवा देते नहीं हैं। सुशील कुमार अंडला
पुत्रवधू को यहां स्वास्थ्य मेले में लाती हूं लेकिन यहां व्यवस्थाएं गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं है, मुझे दोबारा सीएचसी पर जाना पड़ता है। रामो देवी भानौली
अस्पताल पर 24 घंटे सुविधा उपलब्ध नहीं है आपातकालीन मरीजों को खैर या अलीगढ़ जाना पड़ता है, कुत्ते काटे के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। राजीव रावत अंडला
पीएचसी मुख्य मार्ग पर स्थित नहीं है और गांव की पहुंच से दूर है पैदल या बुजुर्गों का वहां पहुंचकर दवा लेना एक चुनौती बना हुआ है। आपातकालीन सुविधाओं का अभाव है। कपिल कुमार अंडला