शोध में कर सकते हैं इस्तेमाल, लेकिन नियम सख्त
आईसीएमआर का मानना है कि स्वीकृत बीमारियों के अलावा स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग केवल शोध के तहत ही किया जा सकता है। इसके लिए कड़े नियम तय किए गए हैं जिनमें क्लीनिकल ट्रायल की अनिवार्यता, संस्थागत एथिक्स कमेटी की मंजूरी, संबंधित नियामक एजेंसियों जैसे औषधि नियंत्रक विभाग की अनुमति लेना शामिल है। इसके लिए मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। साथ ही परीक्षण के दौरान नुकसान या मृत्यु की स्थिति में मुआवजा देना जरूरी है।
डॉक्टर, अस्पताल के खिलाफ होगी कार्रवाई
एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने कहा है कि तय मानकों के बाहर या बिना स्वीकृति के दी गई स्टेम सेल थेरेपी को अवैध माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित डॉक्टरों और संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एडवाइजरी को सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सिर्फ इन बीमारियों में मान्य है स्टेम सेल थेरेपी
आदेश के मुताबिक, ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, एप्लास्टिक एनीमिया के अलावा कुछ इम्यून सिस्टम और बोन मैरो से जुड़ी बीमारियों के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।