महानगर के शाहजमाल नींवरी मोड़ इलाके में पांच दिन पहले खोदा गया नाला बृहस्पतिवार को बड़ी आफत बन गया। यहां सुबह-सुबह नाले में डूबने से बच्ची की मौत के बाद भड़की भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया।
गोंडा मोड़ पर जाम लगाते हुए पुलिस, प्रशासन और नगर विधायक जफर आलम के खिलाफ नारेबाजी की। लोग मुआवजे की मांग पर अड़े थे। घंटों समझाने, मनाने के बाद भी वह मानने को तैयार नहीं थे। दोपहर दो बजते-बजते तो लोगों ने पुलिस पर ईंट पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। हरकत में आई पुलिस ने लाठियां फटकारते हुए भीड़ को खदेड़ा, तब जाकर जाम दुपहर में खुल सका। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस मौजूदगी में ही बच्ची के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
शाहजमाल निवासी शाकिर के घर तीन माह पूर्व उसकी भांजी तीन वर्षीय शिफा पुत्री मोनू आई थी। सुबह वह अपने मामा के बच्चों के साथ पड़ोस में दुकान में पहुंची, जहां से खेलते-खेलते पास के नाले में जा गिरी, लोगों की भीड़ एकत्रित हुई और आननफानन उसे बाहर निकाला गया, तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। बच्ची की मौत से आक्रोशित हुए लोगों ने नीवरी मोड़ पर जाम लगा दिया।
बच्ची के शव को चारपाई पर रखकर गोंडा मोड़ पर ले आए और यहां जाम लगाकर नगर विधायक व नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। गुस्साए लोगों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और नगर विधायक के साथ ही बदायूं सांसद धर्मेंद्र यादव के होर्डिंग भी फाड़ डाले। खबर पर पहुंची देहली गेट, बन्नादेवी व महिला थाना पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया तो मुआवजे की बात सामने आई। अधिकारियों से वार्ता कर मुआवजे पर सहमति बनी और कहा गया कि पहले जाम खुलेगा। शव का पोस्टमार्टम होगा, उसके बाद मुआवजा आदि दिया जाएगा। मगर पब्लिक मानने को तैयार ही नहीं थी। दोपहर बाद पुलिस के लाठियाने के बाद जाम खुल सका।