बैनामों में स्टांप की चोरी रोकने के लिए शासन ने मकान, फ्लैट खरीदने से पहले अब डीएम के यहां 100 रुपये की फीस के साथ आवेदन करना अनिवार्य कर दिया है। इस नियम के तहत डीएम स्तर से पहले संपत्ति की जांच कराते हुए उसका स्टांप शुल्क जांचा जाएगा। इसमें डीएम लेखपालों के माध्यम से यह जांच कराएंगे।
नये फरमान के आने से स्टांप विभाग में उप निबंधक कार्यालयों में बैनामों की चोरी कराने वाले दलाल परेशान हैं। वह लेखपालों को साधने में जुट गए हैं। जिला स्तर की बात करें तो यहां पर हर रोज बैनामों में स्टांप की चोरी हो रही है। खुद सरकारी आंकड़ें इस बात के गवाह हैं। जनवरी 2021 से अब तक 363 मुकदमे स्टांप की चोरी के दर्ज हुए हैं।
बैनामा होने के बाद स्थलीय निरीक्षण का नियम
स्टांप एवं पंजीयन विभाग के मुताबिक बैनामा होने के बाद प्रॉपर्टी का स्थलीय निरीक्षण का नियम है। इसके तहत प्रतिमाह जिले के पांच सबसे अधिक कीमत वाले बैनामों का स्थलीय जांच डीएम करते हैं। इसके बाद 25 बड़े बैनामों का स्थलीय निरीक्षण एडीएम वित्त एवं राजस्व करते हैं। वहीं, इनसे कम कीमत वाले 50 बैनामों की जांच का जिम्मा एआईजी स्टांप के पास है। इसके अलावा शिकायतों के आधार पर सब रजिस्ट्रार भी स्थलीय निरीक्षण करते हैं।
स्टांप चोरी के मुकदमे
माह मुकदमे
जनवरी 64
फरवरी 66
मार्च 70
अप्रैल में 83
मई और जून 80
नया नियम यह है
स्टांप एक्ट की धारा 31 के तहत प्रॉपर्टी खरीदने से पहले डीएम के यहां आवेदन देकर उसके स्टांप शुल्क को जानने का अधिकार पहले से क्रेता को है। अब इसमें 100 रुपये की फीस जोड़ दी गई है। साथ ही सभी के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह प्रॉपर्टी खरीदने से पहले डीएम के यहां आवेदन देंगे, डीएम लेखपाल से उसकी जांच कराते हुए स्टांप शुल्क तय कराएंगे। इसके बाद बैनामा होगा।