यूपी एसटीएफ के संस्थापक सदस्य और प्रदेश के दुर्दांत अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला एनकाउंटर टीम के खास किरदार रहे आईपीएस अफसर एसएसपी राजेश पांडेय को 5 अप्रैल को चौथा वीरता पुरस्कार मिलने जा रहा है। यह पुरस्कार लखनऊ में 3 से 8 अप्रैल तक आयोजित होने वाले पुलिस वीक में राज्यपाल रामनाईक द्वारा दिया जाएगा। राष्ट्रपति की ओर से यह पुरस्कार उन्हें कोलकाता में 1998 में यूपी के 1 लाख के इनामी मंजीत सिंह सहित चार कुख्यात अपराधियों को मार गिराने के लिए मिलने जा रहा है। राजेश पांडेय उत्तर प्रदेश के दूसरे ऐसे आईपीएस अफसर हैं, जिन्हें चौथी बार यह पुरस्कार मिल रहा है। इससे पहले आईपीएस विजय भूषण को चार बार यह पुरस्कार मिला है।
वर्ष 1998 में पश्चिम बंगाल के कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में हुई इस मुठभेड़ में चार अपराधी मारे गए थे, जबकि दो को दबोचा गया था। इस सफल ऑपरेशन को खुद उस समय डीएसपी रहते राजेश पांडेय ने नेतृत्व किया था। इस ऑपरेशन के लिए राष्ट्रपति की ओर से 15 अगस्त 2016 को राजेश पांडेय को यह सम्मान मिलने की घोषणा हुई थी। जिसे इस पुलिस वीक में राज्यपाल द्वारा दिया जाएगा। चौथी बार राष्ट्रपति से वीरता पुरस्कार पाने पर खुद एसएसपी बेहद उत्साहित हैं। वह इतना ही कहते हैं कि यह उनके लिए गौरव की बात है। हालांकि यूपी एसटीएफ की स्थापना के उस दौर को याद करते हुए यही कहते हैं कि उस मेहनत का नतीजा है।
बता दें कि इससे पहले राजेश पांडेय को तीन बार राष्ट्रपति का वीरता पुरस्कार, एक बार राष्ट्रपति का सराहनीय सेवा सम्मान मिल चुका है और एक बार संयुक्त राष्ट्र से शांति सेना के लिए काम करने पर पीस पुरस्कार मिल चुका है। लगातार चौथी बार यह पुरस्कार मिलने पर उनके परिवार में भी बेहद खुशी का माहौल है।
अब तक यह मिले पुरस्कार
1999 में राष्ट्रपति का पहला वीरता पुरस्कार कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला एनकाउंटर के लिए
2000 में राष्ट्रपति का दूसरा वीरता पुरस्कार लखनऊ के जनपथ क्षेत्र में एनकाउंटर के लिए
2007 में राष्ट्रपति का तीसरा वीरता पुरस्कार लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी को मार गिराने के लिए
2008 में संयुक्त राष्ट्र का शांति सेना पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र सेना में सर्विस ऑफ पीस के लिए
2005 में राष्ट्रपति का सराहनीय सेवा पुरस्कार पुलिस महकमे में बेहतर सेवाओं के लिए दिया
एक राष्ट्रपति से लगातार दो बार मिला सम्मान
आईपीएस राजेश पांडेय पीपीएस सेवा 1989 में आए। इसके बाद वर्ष 2005-06 में आईपीएस सेवा में आए। इस दौरान वह लंबे समय तक एसटीएफ के गठन से लेकर काफी बाद तक एसटीएफ में रहे। इसी बीच श्रीप्रकाश शुक्ला गैंग का सफाया हुआ और लगातार दो बार उन्हें राष्ट्रपति के आर नारायणन ने वर्ष 1999 और 2000 डीएसपी रहते वीरता पुरस्कार दिया। इसके बाद एएसपी रहते अब्दुल कलाम ने सराहनीय सेवा और फिर प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने वीरता पुरस्कार दिया।