श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए रविवार को श्री वार्ष्णेय मंदिर में बैठक हुई। जिसमें तय हुआ कि छह सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जाएगा एवं सात सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा।
तय हुआ कि पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी छह सितंबर को दोपहर 03.37 मिनट पर शुरू होगी और सात सितंबर की शाम 04.14 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त छह सितंबर की मध्यरात्रि 12:02 से मध्यरात्रि 12:48 तक है। पूजा की अवधि केवल 46 मिनट की ही रहेगी। जन्माष्टमी व्रत पारण का समय सात सिंतबर की सुबह 06.09 के बाद है।
आचार्यों ने कहा कि पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस मान्यता के अनुसार गृहस्थ लोग छह सितंबर को जन्मोत्सव मनाएंगे। इस दिन रोहिणी नक्षत्र है। ऐसा अद्भुत संयोग बनना बहुत शुभ है। वैष्णव संप्रदाय में श्रीकृष्ण की पूजा सात सितंबर को होगी।
बैठक में शामिल आचार्य भरत तिवारी, मंहत मनोज मिश्रा, पंडित राधे शात्री, पंडित ओमप्रकाश अवस्थी, पंडित रवि शर्मा, पंडित रिंकू शर्मा, प्रदीप शर्मा, हिमांशु शाष्त्री, ललित बल्लभ, दीपेंद्र नीलकंठ, पंडित सुधीर भारद्वाज, पंडित सुशील शर्मा, मुनेश कुमार शर्मा, विपिन कौशिक, सुशील शर्मा, आचार्य अरविंद, कौशल किशोर आदि शामिल हुए।