गैंग लीडर मुनीर मेहताब निवासी सहसपुर बिजनौर अब मृत, आशुतोष मिश्रा निवासी जेबी पुरम कालोनी फैजाबाद, रैय्यान, तंजीम अहमद व जैनी निवासी सहसपुर बिजनौर, वरुण गौड़ निवासी फायर बिग्रेड कालोनी बन्नादेवी, अतीउल्लाह निवासी सरिया टोला बेतिया बिहार, तारिक आजमी निवासी चकियान निजामाबाद आजमगढ़, शेख सादाब निवासी कासिमगंज आजमगढ़, फराज उर्फ अकबर निवासी गुरसहायगंज कन्नौज, मो.कासिफ लारी निवासी टाउन लार देवरिया, रिहान आजमी निवासी निजामाबाद आजमगढ़, सऊद अहमद सिद्दीकी निवासी टांडा अंबेडकर नगर 50 हजारी इनामी फरार, अदनान उर्फ शकील उर्फ शेख निवासी टांडा अंबेडकर नगर, यासिर निवासी नौसा बरला अलीगढ़।
ये भी रहे गैंग से जुड़े
यासिर का एक भाई सद्दाम जिसकी हत्या खुद मुनीर ने की, दूसरा भाई फहद जो बीमारी से मारा गया और तीसरा एक अन्य भाई इनसे जुड़े रहे हैं।
मुकीम काला-मुख्तार से जुड़ाव दूरी की बड़ी वजह
इन दोनों के बीच दूरी की दूसरी बड़ी वजह मुनीर का पश्चिमी यूपी के मुकीम काला ग्रुप से जुड़ना और पूर्व यूपी के मुख्तार अंसारी ग्रुप से जुड़ना भी रहा। जिसका आशुतोष विरोध करता था।
अब अलीगढ़ में रहकर बने गैंग पर सबकी नजर
एएमयू में रहने के दौरान इन दोनों ने मिलकर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ नाम से गैंग बनाया। जिसके अधिकांश सदस्य एएमयू में सक्रिय थे। उनमें से अब अधिकांश अलीगढ़ में नहीं हैं। एक तो दुबई शिफ्ट हो गया है। बाकी अपने-अपने जनपदों में हैं। बस आशुतोष जेल में है और सऊद फरार है। फिर भी मुनीर व आशुतोष से अलग अलग नए लड़के जुड़े हैं और इनके लिए काम करते हैं। मगर अब सवाल यह है कि आखिर मुनीर के बाद पूरी तरह कमान किसके हाथ होगी। चूंकि सऊद आज भी फरार है और मुनीर आशुतोष का पूरा रुपया भी उसी के पास है। साथ में वर्ग विशेष आशुतोष को गैंग सरदार बनते नहीं देखना चाहता है। इसे लेकर सभी की नजर बनी हुई है।
मुनीर की मौत के बाद ग्रुप में अंदरखाने टकराव को लेकर दिल्ली पुलिस भी जागरूक है। यही वजह मानी जा रही है कि लंबे समय बाद आशुतोष को पेशी पर लाया गया तो दिल्ली से उसे कमांडो सुरक्षा में लाया गया। रेलवे स्टेशन से दीवानी तक भी उसे पुलिस वैन में लाया गया। इस दौरान अपने जरायम रिकार्ड के पहले क्वार्सी में दर्ज 307 के मुकदमे में उसकी पेशी हुई।
एडीजे-3 राजेश भारद्वाज की अदालत में आशुतोष को पेश किया गया। इस दौरान एडीजीसी जेपी राजपूत ने बताया कि आरोपी के बयान दर्ज कराने के लिए उसे तलब किया गया था। न्यायालय में आरोपी के बयान दर्ज किए गए। यह मुकदमा वर्ष 2013 का है। जिसमें नगला पटवारी रोड पर एक युवती संग लाते समय उसे घेरा गया था। तभी उसने कुछ लोगों पर हमला किया था। इस मामले में अब उसे 6 फरवरी को अंतिम बहस के लिए तलब किया गया है।
इधर, बता दें कि दिल्ली से उसे कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया। एक कमांडो के अलावा आधा दर्जन दिल्ली पुलिस के कर्मी उसे साथ लेकर आए। इस दौरान रेलवे स्टेशन से दीवानी में पेशी भी अलीगढ़ पुलिस के वाहन में कराई गई। खास बात यह रही कि आशुतोष को सिर्फ उसके अधिवक्ता के अलावा किसी से मिलने तक नहीं दिया गया। न किसी को उसके यहां आने की भनक लगी।