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बसपा के समर्थन को लेकर एएमयू छात्र संघ दो फाड़

Fri, 10 Feb 2017 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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बसपा को समर्थन देने के मुद्दे पर एएमयू छात्र संघ में दो फाड़ होने की नौबत आ गई है। संघ के अध्यक्ष फैजुल हसन एवं सचिव नबील उस्मानी ने दादरी एवं बाबरी के गुनाहगारों (सपा-कांग्रेस गठबंधन) के गठबंधन को अस्वीकार करते हुए जहां विधान सभा चुनाव में बसपा की ओर रुख कर लिया है। वहीं अध्यक्ष एवं सचिव के इस फैसले से उपाध्यक्ष नदीम अंसारी बेहद खफा हैं। उन्होंने अध्यक्ष फैजुल हसन से इस्तीफे की मांग की है और चेतावनी दी है कि पद से त्यागपत्र नहीं दिया तो आम सभा की सहायता लेंगे।
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गुरुवार को एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष फैजुल हसन एवं सचिव नबील उस्मानी ने मैरिस रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों के समक्ष विधान सभा चुनाव में बसपा का पक्ष लिया। अध्यक्ष ने कहा कि सपा सरकार ने मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने एवं बेगुनाहों को रिहा करने का वादा पूरा नहीं किया।
खालिद मुजाहिद की पुलिस कस्टडी में एनकाउंटर, दादरी में अखलाक की हत्या, मुजफ्फरनगर दंगा में मुसलमानों का नरसंहार, औरतों के साथ बलात्कार एवं नजीब को लेकर विरोध मार्च करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज दर्शाता है कि सपा ने आरएसएस का चोला ओढ़ लिया है। कहा, 1936 में एएमयू छात्र संघ द्वारा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का स्वागत किया गया था। उस वक्त यूनियन हॉल से उन्होंने अनुरोध किया था कि मुसलमान और दलित आप एक दूसरे का हाथ मजबूती से पकड़कर चलना। भविष्य का हिंदुस्तान तुम्हारा होगा।
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वह वक्त आज उत्तर प्रदेश में आ गया है। रोहित वेमुला एवं जेएनयू छात्र नजीब प्रकरण का संकेत है कि दलित एवं मुसलमानों को एक साथ आना होगा।दूसरी तरफ प्रेस कांफ्रेंस की सूचना के बाद उपाध्यक्ष नदीम अंसारी भाग कर अपने समर्थकों के साथ यूनियन हॉल पहुंचे। उन्होंने कहा कि एएमयू छात्र संघ का इतिहास रहा है कि किसी भी राजनैतिक दल को समर्थन नहीं करता।
भाजपा से अंदरखाने हाथ मिलाने वाली पार्टी को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। कहा, फैजुल हसन ने एएमयू छात्र संघ की छवि को धूमिल किया है। इस दौरान कैबिनेट मेंबर आसिफ इदरीश, अमानुल्ला, नवेद सिद्दीकी एवं अब्दुल वासे आदि मौजूद थे।  
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