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18.50 करोड़ का लोहा फर्जी बिलों पर बेच कर 3.24 करोड़ के रिफंड वसूले

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अलीगढ़ और आसपास के जिलों में फर्जी नाम पते वाली कागजी फर्मों के बिलों पर करोड़ों का कारोबार कर करोड़ों का रिफंड वसूलने का गोरखधंधा जारी है। लाकडाउन से अनलाक के बीच इन फर्जी फर्मों को बना कर 18.50 करोड़ के लोहे का कारोबार दिखा कर लगभग सवा तीन करोड़ का रिफंड लेने की साजिश का पता चला है। अभी इस मामले में आगरा के एक व्यापारी की जांच जारी है। इसमें विभागीय सूत्रों की मिलीभगत भी चर्चा के केंद्र में हैं।
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वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम के डिप्टी कमिश्नर आरपीएस कौंतेय ने बताया कि दो अलग अलग मामलों में लगभग 14.90 करोड़ और साढ़े तीन करोड़ के लोहे की फर्जी खरीद बिक्री का मामला पकड़ा गया है। मैसर्स बांकेलाल दिल्ली की फर्म ने एटा की यादव ट्रेडर्स के नाम लोहे की खरीद बिक्री दिखाई है, जिसमें आगरा के एक व्यापारी की भूमिका संदिग्ध है। फर्जी बिल में दिए गए नाम पते पर उक्त दोनों फर्म कहीं भी हकीकत में नहीं है। इन्हीं फर्जी बिलों के जरिए माल लेकर चला ट्रक सचल दल की जांच में कासगंज में पकड़ा गया तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। अभी आगरा के उक्त व्यापारी की जांच जारी है।
ऐसे ही दूसरे मामले में चाहत इंटरप्राइजेज गाजियाबाद की फर्म से कासगंज की विशाल ट्रेडर्स को साढ़े तीन करोड़ के लोहे का कारोबार किया गया। जब जांच हुई तो दोनों फर्म दिए गए जमीनी पते पर नहीं मिली हैं। माल कहीं और से कहीं और जा रहा था, जिसमें उक्त दोनों फर्जी बिलों का इस्तेमाल किया गया था। अब इसकी जांच हो रही है कि आखिर ये माल किसका था और बिना सही बिल के कहां जा रहा था। असली माल जो आया गया है उसके बिल कहां हैं। इन दोनों मामलों में लगभग 18.50 करोड़ के लोहे के कारोबार को दिखा कर लगभग सवा तीन करोड़ का सरकारी रिफंड वसूलने की तैयारी थी, जिसमें से कुछ रिफंड फर्जीवाड़ा करने वालों के खाते में पहुंच भी गया है। फिलहाल दोनों मामलों की कड़ियां जोड़ कर गहन जांच पड़ताल जारी है। गौर हो कि पूरे प्रदेश में फर्जी रिफंड वसूलने की पहली रिपोर्ट अलीगढ़ के हरदुआगंज थाने में दर्ज हुई थी।
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