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SMPMS: एएमयू छात्र ने बनाई एक मशीन, जिससे होंगी शरीर की कई जांचें..पांच मिनट में आएगी रिपोर्ट

Thu, 26 Jun 2025 12:54 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

कोरोना महामारी के कठिन समय में जब विश्व भर में सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर चुनौतियां थीं, उस समय सतेंद्र ने ऑटोमेटिक सेनिटाइजेशन सिस्टम बनाया था। अब उनके सिस्टम को अमेरिका की प्रतिष्ठित टेक्निकल संस्था आईईईई ने स्वीकार कर लिया है।
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सिस्टम का डिजाइन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एएमयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र सतेंद्र पाल सिंह ने एक ऐसा स्मार्ट मेडिकल पैरामीटर मॉनीटरिंग सिस्टम (एसएमपीएमएस) बनाया है, जिसमें शरीर का तापमान, रक्तचाप, दिल की धड़कन, एसपीओ, शरीर की लंबाई, वजन सहित कई जांच हो सकेंगी। पांच मिनट में रिपोर्ट मिल जाएगी। सिस्टम का पेटेंट कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सतेंद्र ने बताया कि इस सिस्टम को बनाने में छह महीने का समय लगा है, जिसमें करीब 10 हजार रुपये की लागत आई है। सिस्टम में लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण की क्षमता है।

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आमजन के लिए भी होगा फायदेमंद
सतेंद्र ने कहा कि यह सिस्टम आमजन के लिए फायदेमंद होगा। जब ज्यादा संख्या में सिस्टम बनाएंगे, तब इसमें लागत कम आएगी और आमजन खरीद सकते हैं। इसके साथ स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार को भी प्रस्ताव देंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और मशीन लर्निंग का उपयोग करना चाहते हैं, ताकि यह प्रणाली बीमारी के संभावित लक्षणों को पहचान सके और चेतावनी दे सके। इसके साथ ही 10-टी के माध्यम से रिमोट मॉनिटरिंग, क्लाउड स्टोरेज, और मोबाइल एप इंटरफेस जैसी सुविधाएं जोड़ने का भी प्रस्ताव है।

सिस्टम की विशेषताएं

  • यह शरीर का तापमान, रक्तचाप, दिल की धड़कन, एसपीओ, शरीर की ऊंचाई, शरीर का वजन और बीएमआई की जांच करेगा
  • आसान इंटरफेस - हर उम्र और भाषा के उपयोगकर्ताओं के लिए यह प्रणाली अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, मोबाइल हेल्थ वैन और ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों में विशेष उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

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ऑटोमेटिक सेनिटाइजेशन सिस्टम को मिली आईईईई अमेरिका से मान्यता
कोरोना महामारी के कठिन समय में जब विश्व भर में सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर चुनौतियां थीं, उस समय सतेंद्र ने ऑटोमेटिक सेनिटाइजेशन सिस्टम बनाया था। अब उनके सिस्टम को अमेरिका की प्रतिष्ठित टेक्निकल संस्था आईईईई ने स्वीकार कर लिया है।

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