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बनना था स्मार्ट...लेकिन दागदार हो गया शहर का चेहरा

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ठंडी सड़क पर डाला गया रेत। - फोटो : CITY OFFICE
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स्मार्ट सिटी परियोजना को पांच साल पूरा होने को हैं। इस दौरान लाइट और कंट्रोल एवं कमांड सिस्टम को छोड़ दें तो बाकी के सभी काम अधूरे हैं। शहर के प्रमुख मार्गों को स्मार्ट बनाने के लिए कई साल पहले खोद दिया गया लेकिन उनको अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। पिछले साल तक तो इन अधूरे कामों के लिए अधिकारी कोरोना संक्रमण का तर्क दे रहे थे । सरकार भी मान रही है कि अब कोरोना नहीं है तो देरी किस बात की है। हालात यह हैं कि जगह जगह गड्ढे हो गए हैं, सड़कें उखड़ी पड़ी हैं और धूल के गुबार उड़ रहे हैं।
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सिविल लाइन इलाके को फोकस करते हुए 2017 में स्मार्ट सिटी परियोजना मंजूर हुई थी। उसी के एक साल बाद यानी कि 20188 से काम शुरू हुए, जिसके तहत 42 विकास और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इन निर्माण कार्यों के समय से पूरा न होने के कारण लोग कहने लगे हैं कि पता नहीं शहर कब स्मार्ट बनेगा । कठपुला पार कर घंटाघर की ओर आते ही उखड़ी सड़कें, टूटे डिवाइडर, अस्त - व्यस्त चौराहे हैं। एएमयू से कलेक्ट्रेट को जाने वाली ठंडी सड़क तीन महीने से बंद पड़ी है। जिसको इसी जून माह में पूरा केरने का लक्ष्य था। मगर कब तक यह सड़क बनेगी, कोई भी अधिकारी कुछ कहने के लिए तैयार नहीं है । यही हाल फुटपाथ और नालों की रैलिंग का है।
- शहर में स्मार्ट सिटी बनाना अच्छी बात है। मगर काम की गति तेज होनी चाहिए। आधे शहर की जनता सुबह नकवी पार्क घूमने जाती है। मगर इन दिनों वहां का वातावरण ऐसा नहीं कि लोग घूमने जाएं और शुद्ध वातावरण मिले। आसपास निर्माण के चलते बहुत दिक्कत हो रही है। विवेक बगई, व्यापारी
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-कई बड़े शहरों में देखने को मिलता है कि इस तरह के विकास व निर्माण कार्य सिर्फ रात में कराए जाते हैं। जिन इलाकों में डायवर्जन लागू करना हो, उन इलाकों में काम तेजी से होता है। मगर यहां ऐसा नहीं है। -श्री कांत शर्मा एडवोकेट
निर्माण में देरी के लिए कोविड भी एक वजह थी। दूसरे कारणों में निर्माण एजेंसियों की लापरवाही भी है। कुछ निर्माण के लिए जन प्रतिनिधियों के सुझाव भी देरी से मिले हैं। विद्युत लाइनों के अंडरग्राउंड होने में भी कारण रहे है। -गौरव दयाल, मंडलायुक्त
स्मार्ट सिटी के अधूरे प्रोजेक्ट
1 -अचलताल ऱ् शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल अचल सरोवर का 25 करोड़ रुपये से नवनिर्वाण और सौंदर्यीकरण 14 जुलाई तक पूरा होना है। मगर लगता नहीं कि यह काम समय से पूरा होगा।
2 - 41.72 करोड़ रुपयों से 14 चौराहों का अक्तूबर तक सौंदर्यीकरण ऱ् शहर के इन प्रमुख चौराहों में अब्दुल्ला चौराहा, रामलीला मैदान, अग्रसेन चौक, मसूदाबाद, गांधीपार्क, मधेपुरा, दुबे का पड़ाव, सब्जी मंडी, जामा मस्जिद, शमशाद मार्केट, मदार गेट, तहसील तिराहा, कबर कुत्ता, तस्वीर महल चौराहा का सौंदर्यीकरण। कई चौराहों पर तो अभी शुरुआत ही नहीं हुई है, इस वजह से समय से पूरा होने के आसार नहीं हैं।
3 - एएमयू सर्किल से घंटाघर तक स्मार्ट रोड 16.85 करोड़ रुपये से जून में बनकर तैयार होनी थी। मगर इस रोड को पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं।
4 - चार चौराहों का सौंदर्यीकरण ऱ् 54.26 करोड़ रुपये की लागत से सारसौल, क्वार्सी, एटा चुंगी, सासनी गेट चौराहे का सौंदर्यीकरण दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है लेकिन अभी तक शुरुआत ही नहीं हुई है।
5 -नकवी पार्क का सौंदर्यीकरण, 17.53 करोड़ रुपये की लागत से पार्क का सौंदर्यीकरण अक्तूबर तक पूरा होने का लक्ष्य रखा था लेकिन इसके भी समय से पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं ।
6 -सीवर व सीटीपी प्रोजेक्ट:500 करोड़ लागत से शहर भर में सीवर व सीटीपी प्रोजेक्ट लगना था। समयावधि निकल चुकी है। मगर अभी तक काम पूरा नहीं हुआ है।

डिग्गी मार्ग पर खुदी पड़ी सड़क।- फोटो : CITY OFFICE

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