लघु उद्योगपतियों को कई बार कच्चा माल प्राप्त करने में कठिनाई, बिजली कटौती, पूंजी की कमी, समय पर वस्तुओं और सेवाओं की डिलीवरी में विफलता, बिक्री आय प्राप्त होने में देरी आदि समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।
हर साल 30 अगस्त भारत में राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। छोटे स्तर के व्यवसाय न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं बल्कि आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लघु उद्योगपतियों को कई बार कच्चा माल प्राप्त करने में कठिनाई, बिजली कटौती, पूंजी की कमी, समय पर वस्तुओं और सेवाओं की डिलीवरी में विफलता, बिक्री आय प्राप्त होने में देरी आदि समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है।
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सरसौल स्थित महेश कुमार ने कहा कि कई बार सड़क खराब होने की वजह से लोकल ट्रांसपोर्ट को समय पर माल पहुंचने में परेशानी होती है और समय पर माल न मिलने के कारण नुकसान भी होता है। वहीं मनीष सिंह ने बताया कि कुटीर उद्योगों के लिए निवेश मिलना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि अधिकांश निवेशक मध्यम और बड़ी कंपनियों में निवेश करना पसंद करते है, ताकि जल्द से जल्द पैसा मिले। पर्याप्त और समय पर ऋण प्राप्त करने में समस्याएं होती है।
कच्चा माल बहुत ऊंचे दामों में मिलता है।किफायती दामों पर कच्चा माल प्राप्त करने में कठिनाई होती है।-बृजेश यादव,नादा बाईपास अलीगढ़।
ऋण प्राप्त करने में समस्या आती है।फॉर्मेलिटी इतनी अधिक होती है कि लोन प्राप्त करने में बहुत समय लग जाता है।जिसके कारण दूसरी जगह से अधिक ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है।- रिचा जिंदल, जनकपुरी अलीगढ़।
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अधिकांश मजदूर अशिक्षित या अर्ध कुशल हैं और यह उद्योगों और उनसे जुड़े रोजगार की नाजुक प्रकृति को बढ़ाता है।- शानू खान, शाहजामाल अलीगढ़।