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AMU: जेएन मेडिकल कॉलेज में बनेगा स्किन बैंक, जले के निशान मिटेंगे, बर्न सेंटर के लिए दिया प्रस्ताव

Sat, 22 Feb 2025 03:48 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

मेडिकल कॉलेज में स्किन बैंक बनने से अलीगढ़, बुलंदशहर, हाथरस, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद सहित पश्चिम यूपी के जिलों के आग से झुलसे गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधा मिलेगी।
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जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में स्किन बैंक बनेगा। इसके लिए प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (एचईएफए) को प्रस्ताव भेज दिया है। अलीगढ़ मंडल में यह अपनी तरह का पहला स्किन बैंक होगा। इस बैंक में दानदाताओं की स्किन को सुरक्षित रखा जाएगा। गंभीर मरीजों के झुलसे अंग पर स्किन लगाकर उसे बेहतर बनाया जाएगा। 

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जेएन मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में रोजाना 5-6 झुलसे मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें दो मरीजों की हालत गंभीर होती है। 40 फीसदी झुलसे मरीजों को 3-4 सप्ताह तक वार्ड में रहना पड़ता है, जबकि 40 फीसदी से ज्यादा झुलसे मरीजों का ऑपरेशन होता है। अभी तक स्किन बैंक न होने से कुछ मरीजों के झुलसे अंग को बेहतर बनाने के लिए उन्हें दिल्ली रेफर किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में स्किन बैंक बनने से अलीगढ़, बुलंदशहर, हाथरस, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद सहित पश्चिम यूपी के जिलों के आग से झुलसे गंभीर मरीजों को इलाज की सुविधा मिलेगी। उन्हें इलाज के लिए नोएडा और दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। 

देहांत के छह घंटे बाद तक ली जा सकती स्किन 
मेडिकल कॉलेज में स्किन बैंक की बेहद जरूरत है। किसी व्यक्ति के देहांत के छह घंटे बाद तक स्किन ली जा सकती है। स्किन बैंक में स्किन को सुरक्षित रखा जाएगा, जिसकी मियाद 3-4 सप्ताह तक होगी। किसी भी मृत व्यक्ति की जांघ, पेट, पीठ, पैर और कमर के हिस्से से 0.018 इंच से 0.005 इंच तक मोटी स्किन ली जा सकती है। 

उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी को मेडिकल कॉलेज में बर्न सेंटर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। करीब 20 करोड़ रुपये से बर्न सेंटर बनेगा। इसमें स्किन बैंक, आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, एडवांस्ड ड्रेसिंग की सुविधा होगी। स्किन बैंक होने से जले हुए मरीजों का बेहतर इलाज हो सकेगा। वह पहले की तरह ही दिखने लगेंगे। इससे मरीजों में आत्मविश्वास पैदा होगा।-डॉ. मोहम्मद फहुद खुर्रम, अध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी विभाग जेएन मेडिकल कॉलेज। 

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देहदान की तरह होती त्वचा दान की प्रक्रिया 

देहदान की तरह त्वचा दान की प्रक्रिया होती है। जिस तरह देहदान नियम के तहत ही त्वचा दान करने और लेने में वह सभी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जो अन्य शरीर के अंगदान में पूरी करनी होती है। जले व्यक्ति की प्लास्टिक सर्जरी कर नई स्किन लगाई जाती है। व्यक्ति को लगने वाली स्किन 21 दिन के बाद अपने आप निकल जाती है, क्योंकि उसके नीचे नई स्किन विकसित होने लगती है।मेडिकल कॉलेज में आने वाली बॉडी से स्किन सिर्फ पांच मिनट में निकाली जा सकेगी। जांघ की बेहतर स्किन मानी जाती है, क्योंकि वह मोटी होती है। जिसे आसानी से जले अंग पर सर्जरी कर लगाई जा सकती है। 

लगाई जा सकती है हर ब्लड ग्रुप की त्वचा
किसी भी ब्लड ग्रुप के पार्थिव शरीर की त्वचा किसी को लगाई जा सकती है। बर्न रोगियों के जख्मों पर त्वचा न होने से शरीर का फ्लुइड निकलता रहता है। इसमें प्रोटीन भी निकल जाता है। त्वचा की परत लगाने से द्रव्य बाहर नहीं निकल पाता। जख्म भरने लगता है। दो सप्ताह में रोगी की अपनी त्वचा बनने लगती है। ड्रेसिंग मैटीरियल के रूप में लगाई गई दान की त्वचा पपड़ी बनकर निकल जाती है। ऊपर से लगाई गई त्वचा दो सप्ताह तक जिंदा रहती है।

क्या है स्किन बैंक
स्किन बैंक भी ब्लड बैंक की तरह होता है। यहां त्वचा को एक शीशी में भरकर मानइस तापमान में रखा जाता है। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी होने पर स्किन बैंक में पांच साल तक त्वचा सुरक्षित रखी जा सकती है। रखने से पहले त्वचा में संक्रमण आदि की भी जांच की जाती है।
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