देहदान की तरह त्वचा दान की प्रक्रिया होती है। जिस तरह देहदान नियम के तहत ही त्वचा दान करने और लेने में वह सभी प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जो अन्य शरीर के अंगदान में पूरी करनी होती है। जले व्यक्ति की प्लास्टिक सर्जरी कर नई स्किन लगाई जाती है। व्यक्ति को लगने वाली स्किन 21 दिन के बाद अपने आप निकल जाती है, क्योंकि उसके नीचे नई स्किन विकसित होने लगती है।मेडिकल कॉलेज में आने वाली बॉडी से स्किन सिर्फ पांच मिनट में निकाली जा सकेगी। जांघ की बेहतर स्किन मानी जाती है, क्योंकि वह मोटी होती है। जिसे आसानी से जले अंग पर सर्जरी कर लगाई जा सकती है।
लगाई जा सकती है हर ब्लड ग्रुप की त्वचा
किसी भी ब्लड ग्रुप के पार्थिव शरीर की त्वचा किसी को लगाई जा सकती है। बर्न रोगियों के जख्मों पर त्वचा न होने से शरीर का फ्लुइड निकलता रहता है। इसमें प्रोटीन भी निकल जाता है। त्वचा की परत लगाने से द्रव्य बाहर नहीं निकल पाता। जख्म भरने लगता है। दो सप्ताह में रोगी की अपनी त्वचा बनने लगती है। ड्रेसिंग मैटीरियल के रूप में लगाई गई दान की त्वचा पपड़ी बनकर निकल जाती है। ऊपर से लगाई गई त्वचा दो सप्ताह तक जिंदा रहती है।
क्या है स्किन बैंक
स्किन बैंक भी ब्लड बैंक की तरह होता है। यहां त्वचा को एक शीशी में भरकर मानइस तापमान में रखा जाता है। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी होने पर स्किन बैंक में पांच साल तक त्वचा सुरक्षित रखी जा सकती है। रखने से पहले त्वचा में संक्रमण आदि की भी जांच की जाती है।