जिले में लॉकडाउन के पांचवें दिन आटा संकट बना रहा। उम्मीद है कि रविवार तक इस गंभीर समस्या का समाधान होने लगेगा। इसके बाद कम से कम आटा को लेकर मारामारी नहीं होगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने फ्लोर मिल मालिकों से सहयोग मांगा है। इन मिलों का संचालन भी प्रशासन की निगरानी में हो रहा है, क्योंकि इन मिलों में मैदा और सूजी का उत्पादन ही अधिक होता है।
इसलिए ये आटा उत्पादन में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं, लेकिन अब प्रशासनिक दबाव में आटा बनने लगा है। अगर सभी छह फ्लोर मिल वालों ने लगातार उत्पादन किया तो रविवार तक अलीगढ़ में 7200 क्विंटल आटा उपलब्ध हो जाएगा। इसके अलावा छोटी चक्कियों से भी उत्पादन हो रहा है। इस तरह से रविवार तक लगभग दस हजार क्विंटल यानी एक हजार टन आटा बाजार में आ जाएगा। इसके बाद आटे की कालाबाजारी रोकी जा सकेगी। आम आदमी को आसानी से आटा उपलब्ध हो सकेगा। इसकी आपूर्ति पूरे जिले में कराई जाएगी। इतनी खपत होने के बाद लगातार आपूर्ति बनी रहेगी और ये संकट दूर हो जाएगा।
फ्लोर मिल संचालक प्रदीप सिंघल ने बताया कि इस मुश्किल वक्त में सभी मिल संचालक देश के हरेक आदमी के साथ हैं। फायदा हो या नुकसान। हर हाल में आटा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए मिलों का सेटअप बदला गया है। जिससे तेज गति से गेहूं से आटा बन सके। मिल परिसर में ही रहने वाले स्टाफ को सैनिटाइज करा कर काम कराया जा रहा है। पूरा परिसर सैनिटाइज किया गया है। हम आम जनता को 25 रुपये किलो के भाव में आटा उपलब्ध कराएंगे। हालांकि खरीद 22.21 रुपये में हो रही है। इसके बाद खर्च मिला कर इस भाव में कुछ नहीं मिल पाएगा।
मिल में ऐसे बनता है आटा
पहले गेहूं छनता है। इसके बाद मिटटी आदि निकाल कर अलग-अलग खांचों में भरा जाता है। इसके बाद सूखा कर इसकी परत निकाली जाती है। परत निकाले जाने के बाद आटा बनाने का काम होता है। चोकर वाला आटा बनाने के लिए इसकी परत नहीं उतारी जाती है। मैदा और सूजी बनाने में अलग प्रक्रिया होती है। मैदा, सूजी और आटा के लिए कुछ उपकरण बदले भी जाते हैं।
फ्लोर मिलों का कारोबार
-जिले में कुल छह रोलर फ्लोर मिल, सभी मैदा और सूजी बनाती हैं।
-आटा बनाने की सबसे बेहतरीन तकनीकी स्विटजरलैंड की है।
-अधिकांश फ्लोर मिल स्विटरजरलैंड की तकनीकी से चल रही हैं।
-हरेक फ्लोर मिल का पूरा सिस्टम 20 करोड़ रुपये में स्थापित होता है।
-एक फ्लोर मिल का सालाना टर्नओवर लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक ।
-आटा बनाने का सेटअप अलग से लगता है, इसलिए नहीं बनाती हैं।
-गर्मी में एक दिन तो सर्दी में दो-तीन दिन में बनता है आटा, सूजी, मैदा।
-एक मिल में सालाना तीन से चार लाख क्विंटल गेहूं की खपत होती है।
-एक मिल एक दिन में 800 से 900 क्विंटल आटा का उत्पादन कर लेती है।
-इलाहाबाद में सबसे बेहतरीन आटा फ्लोर मिल, ये भी 20 करोड़ रुपये का।
-पंजाब का गेहूं सबसे बढ़िया, इसके बाद मध्य प्रदेश का शरबती गेहूं।
-शुक्रवार को फ्लोर मिलों ने 2221 रुपये क्विंटल के भाव में गेहूं खरीदा