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बहनों की भीड़ ने तोड़ा 176 साल का रिकार्ड

Fri, 19 Aug 2016 01:14 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो
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बहनों की भीड़ ने तोड़ा 176 साल का रिकार्ड - फोटो : रुपेश
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हाथ में लगी पॉलीथिन में रेशम की डोरी से बनी राखी और पुड़िया में टीका (तिलक) लगाने का सामान थामे बहनें बृहस्पतिवार सुबह से ही जिला कारागार के बाहर इकट्ठा होना शुरू हो गईं। चेहरे पर आतुरता के भाव और निगाहें कारागार के गेट पर टिकी थीं।
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इंतजार था तो सिर्फ  इस बात का कि कब जेल का गेट खुले और बहनों को भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने का मौका मिले। राखी बांधी तो घर परिवार की बात हुई। दिल की बात को दिल ने छुआ, रुलाई भी छूट गई। भाई से यह न देखा गया तो ढांढस बंधा दिया। प्रार्थना की कि अगला रक्षाबंधन अपने घर पर हो। भाई-बहन के असीम प्यार के इस पर्व पर बहनों की मुलाकात के लिए जेल प्रशासन का रुख भी लचीला रहा। खास बात यह रही कि जेल के 176 साल के इतिहास में पहली बार 3449 बहनें जेल में मुलाकात के लिए पहुंचीं।
बुधवार से ही रक्षाबंधन को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से खासे इंतजाम किए गए थे। बिना पर्ची के बहनों की भाइयों से मुलाकात की व्यवस्था थी। साथ में सुरक्षा के लिहाज से जेल के अंदर ही घेवर बनवाकर बेचा गया। सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक जेल में 10 शिफ्टों में मुलाकात कराई गई।
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जेलर आवास से ही जेल को जाने वाली बहनों की एंट्री रोक दी गई थी। वहां से एक-एक बार में आठ-आठ मुलाकातियों को जेल में भेजा जा रहा था। ताकि किसी तरह की अफरा-तफरी न मचे। इस दौरान वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा, जेलर बिजेंद्र सिंह, डिप्टी जेलर शैलेष सिंह व उनकी पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी रही। इस दौरान महिला बंदी सीमा यादव के सेवियो नवजीवन संस्था में रह रहे बेटे रवि यादव को संस्था द्वारा जेल में लाकर मुलाकात कराई गई।
सबसे बुजुर्ग कैदी की बहन मिलने आई
जेल के सबसे बुजुर्ग 96 वर्षीय सजायाफ्ता कैदी शैतान सिंह की 92 वर्षीय बहन कटोरी देवी भी उनसे मिलने आईं और उन्हें राखी बांधी। इस दौरान कारागार प्रशासन के लोगों ने बुजुर्ग महिला व उनकी बहन को भी अधिक समय दिलाया।
110 किलो घेवर बिका, 2200 रुपये कल्याण कोष में आए
जेल में बिना घाटा बिना मुनाफा पर घेवर बनाकर बेचा गया। यहां कुल 110 किलो घेवर बनाया गया। 200 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचा गया। जिसमें से 2200 रुपये बंदी कल्याण कोष में जमा कराए गए।
28 बहनों के भाई बने अधीक्षक-जेलर
जिला कारागर के महिला बैरक में 28 महिला बंदियों से कोई मिलने नहीं आया। इनसे खुद अधीक्षक व जेलर अन्य स्टाफ ने राखी बंधवाई और अपनी बहन बनाया।
सात साल बाद मिली बहन, फूट-फूटकर रोये
जेल में दहेज हत्या के आरोप में उम्रकैद काट रहे लालू निवासी बहारपुर चंडौस की बहन सात साल बाद उससे मिलने जेल पहुंची। सात साल तक बिना राखी बंधवाए जेल में रहे लालू अपनी बहन की शक्ल देखते ही फूट-फूटकर रोने लगा और उसे देख बहन भी खूब रोई। इस दौरान इस बात की शिकायत भी हुई कि आखिर इतने दिन बाद क्यों। इन दोनों को मुलाकात के लिए कारागार प्रशासन ने सर्वाधिक समय दिया।
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