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Sir Syed Day: सर सैयद ने की थी पत्रकारिता, अंग्रेजी और उर्दू में निकाले थे अखबार-पत्रिकाएं

Fri, 11 Oct 2024 07:46 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

सर सैयद जब मुरादाबाद में न्यायाधीश थे, तब उन्होंने रुड़की से एक प्रिंटिंग मशीन खरीदी थी। उनका जहां तबादला होता था, वह अपने साथ प्रिंटिंग मशीन ले जाते थे। जब उनका तबादला अलीगढ़ के लिए हुआ, तब वह प्रिंटिंग मशीन अपने साथ ले आए, जहां अखबारों का प्रकाशन भी किया।
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द अलीगढ़ इंस्टीट्यूट और उर्दू भाषा में तहजीब उल अखलाक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने पत्रकारिता भी की थी। उन्होंने वर्ष 1866 में अंग्रेजी अखबार द अलीगढ़ इंस्टीट्यूट और उर्दू में तहजीबुल अखलाक निकाला। कई पत्रिकाएं भी उन्होंने प्रकाशित कीं। इनमें वे लोगों के बीच बनीं दूरियों को दूर करने के लिए लेख लिखा करते थे।

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एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद जब मुरादाबाद में न्यायाधीश थे, तब उन्होंने रुड़की से एक प्रिंटिंग मशीन खरीदी थी। उनका जहां तबादला होता था, वह अपने साथ प्रिंटिंग मशीन ले जाते थे। जब उनका तबादला अलीगढ़ के लिए हुआ, तब वह प्रिंटिंग मशीन अपने साथ ले आए, जहां अखबारों का प्रकाशन भी किया। अखबारों में वैचारिक लेख प्रकाशित होते थे। तहजीबुल अखलाक अखबार आज भी प्रकाशित होता है। द अलीगढ़ इंस्टीट्यूट का नाम बदलकर एएमयू गजट कर दिया गया है। दोनों का प्रकाशन आज भी एएमयू में होता है।

अलीगढ़ में स्थापित की थी साइंटिफिक सोसाइटी
एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद की जयंती 17 अक्तूबर को मनाई जाती है। 1864 में जब गाजीपुर से अलीगढ़ के लिए उनका तबादला हुआ था, तब उन्होंने वहां स्थापित साइंटिफिक सोसाइटी को भी अलीगढ़ स्थानांतरित कर दिया था। सोसाइटी के लिए एक भवन हकीम एके तिब्बिया कॉलेज के पास बनाया था।
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डॉ. राहत अबरार ने बताया कि यह इस्लाम की आधुनिक सोसाइटी थी, जिसने विज्ञान, कृषि और सामाजिक विज्ञान में महत्वपूर्ण कार्यों का उर्दू में अनुवाद करने का बीड़ा उठाया। सर सैयद ने जॉन स्टुअर्ट मिल की रूडिमेंट्स ऑफ पॉलिटिकल इकोनॉमी का पंडित धर्म नारायण से उर्दू भाषा में अनुवाद करवाया। उनकी इस परियोजना के साथ अच्छी संख्या में हिंदुओं के जुड़े होने के कारण सोसाइटी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को एक साथ लाने का एक मंच भी थी।

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