इस सरल मार्गदर्शिका में क्या है खास?
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) प्रमोद कुमार से मिली जानकारी के अनुसार, इस मार्गदर्शिका को बेहद सरल और व्यावहारिक बनाया गया है ताकि कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी अपनी संपत्ति की कीमत खुद जान सके।
दो हिस्सों में बंटा मूल्यांकन
संपत्तियों के मूल्यांकन को आसान बनाने के लिए इसे दो मुख्य भागों में बांटा गया है। पहला, मुख्य सड़क (रोड सेगमेंट) पर स्थित संपत्ति और दूसरा, सड़क से हटकर (भीतर) स्थित संपत्ति।
हर क्षेत्र के लिए अलग नियम
नगरीय , अर्द्धनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाली कृषि भूमि, गैर-कृषि भूमि, दुकान, फ्लैट और औद्योगिक परिसरों के मूल्यांकन की अलग-अलग और स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
उदाहरण और फॉर्मूले शामिल
मार्गदर्शिका में केवल नियम नहीं हैं, बल्कि उदाहरणों और गणितीय सूत्रों के जरिए समझाया गया है कि किस तरह कोई भी व्यक्ति क्रमबद्ध तरीके से अपनी संपत्ति का सही मूल्य निकाल सकता है।
अन्य संरचनाओं का भी होगा सही आकलन
जमीन-मकान के साथ-साथ अब भवन निर्माण की गुणवत्ता, वृक्ष, सबमर्सिबल पंप, बोरवेल, कुआँ और मिश्रित उपयोग वाले भवनों के मूल्यांकन के लिए भी स्पष्ट निर्देश शामिल किए गए हैं।
अधिकारियों को निर्देश
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने सहायक महानिरीक्षक निबन्धन अलीगढ़ और जिले की सभी तहसीलों के उप-निबन्धकों को निर्देशित किया है कि वे इस मार्गदर्शिका को जन-जन तक पहुंचाएं। इसके साथ ही, मानकीकृत मूल्यांकन सूची लागू होने के बाद सभी सब-रजिस्ट्रार (उप निबन्धक) अपने-अपने स्तर पर संबंधित पृष्ठ संख्या अंकित कर जनता के लिए इसे सुलभ बनाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस नई गाइडलाइन के आने से अब रजिस्ट्री कार्यालयों में होने वाली मनमानी पर पूरी तरह रोक लगेगी। जनता सीधे तौर पर सशक्त होगी और अपनी संपत्ति का मूल्यांकन स्वयं समझ सकेगी।