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खेरेश्वर से गभाना टोल: पुलिस चौकियों पर सन्नाटा, खाली पड़े बूथ, रात में हाईवे पर नहीं कोई सुरक्षा इंतजाम

Mon, 14 Apr 2025 01:41 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

रात डेढ़ बजे से ढाई बजे तक अमर उजाला की टीम ने खेरेश्वर से गभाना टोल तक पड़ताल की। गभाना टोल तक पेट्रोलिंग वाहन नजर ही नहीं आए, हाईवे का अधिकांश हिस्सा अंधेरे में डूबा हुआ था। हाईवे पर बने गड्ढों से हादसे का डर बना रहता है।
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रात 2.30 बजे गभाना से अलीगढ़ हाईवे पर नही तो लाइट जल रही नही कोई भी पुलिसकर्मी दिखा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दिल्ली-कानुपर हाईवे पर रात में अलीगढ़ से होकर सफर कर रहे हैं तो खुद भी सजग रहे, यहां आपसे टोल तो लिया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा और सुविधाओं के कोई इंतजाम नहीं है। पुलिस चौकियों पर सन्नाटा था, हाईवे पर न तो पुलिस की और न ही एनएचएआई की पेट्रोलिंग टीम नजर आई।

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11 अप्रैल रात डेढ़ के बजे से ढाई बजे तक अमर उजाला की टीम ने खुद सफर कर पड़ताल की तो यह हालात नजर आए। खेरेश्वर से गभाना टोल तक पेट्रोलिंग वाहन नजर ही नहीं आए, हाईवे का अधिकांश हिस्सा अंधेरे में डूबा हुआ था। हाईवे पर बने गड्ढों से हादसे का डर बना रहता है। कुल मिलाकर हाईवे का सफर राम भरोसे ही है।

हाईवे सुरक्षा के लिए हर दिन एक थाना प्रभारी या सीओ चेकिंग पर निकलते हैं। वे देखते हैं कि कहां ड्यूटी लगी मिली, कहां नहीं मिली। बूथ या चौकी पर रहना ही है, ये निर्धारित नहीं है। हां, भ्रमणशील जरूर रहना है। साथ में सीसीटीवी से निगरानी के इंतजाम हैं। अब शुक्रवार रात में किस किस तरह की कमियां रही हैं। इसे चेक कराया जाएगा और जवाब तलब किया जाएगा। नए सिरे से थानों को निर्देश जारी किए जाएंगे।-मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटी

अंधेरे में डूबा था महरावल कट

अमर उजाला टीम ने रात डेढ़ बजे हाईवे को सारसौल से जोड़ने वाले महरावल कट से सफर की शुरूआत की। महरावल कट पर पुल के नीचे व आसपास का हिस्सा घुप अंधेरे में डूबा था। एक निजी बस में खराबी आई हुई थी। बस स्टाफ व कुछ यात्री उतरकर उसे चेककर रहे थे। अंदर सवारियां इस बात से दहशत में थीं कि आधी रात को अंधेरे व बीच रास्ते में फंस गए। पूछने पर बस स्टाफ ने बताया कि अब रात को किसे याद करें। इंजन में कुछ परेशानी आई है। सही कर रहे हैं। इस पुल पर कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं थे।

भांकरी में नहीं थी पीआरवी, पेराई मोड़ चौकी मिली बंद

महरावल कट से आगे बढ़ने पर गांव भांकरी तक पहुंचे। इस बीच पीआरवी का एक प्वाइंट निर्धारित है। मगर वहां कोई नहीं था। भरतरी चौकी भी अंधेरे में डूबी थी। इसके बाद बीधा नागर से पला सल्लू, चूहरपुर होते हुए हाईवे के सहारे बनी पेराई मोड़ चौकी पहुंचे तो यह भी बंद थी। कुछ बाइकें खड़ी थीं। अंदर कोई था या नहीं, दरवाजा बंद होने के चलते ये नहीं कहा जा सकता।

न कोई पिकेट थी और न ही पेट्रोलिंग वाहन मिला
बरौली चौराहा, गभाना कट, तहसील तिराहा से लेकर टोल प्लाजा तक किसी भी निर्धारित प्वाइंट पर न पीआरवी थी, न पुलिस पिकेट थी न अन्य कोई पेट्रोलिंग जीप थी। टोल प्लाजा पर एंबुलेंस खड़ी थी। जब वहां स्टाफ से एनएचएआई की पेट्रोलिंग जीप के विषय में पूछा तो कहा कि कहीं घूम रही होगी। जानकारी नहीं है। मगर कहां, ये नहीं पता।
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कुलवा में ढाबे के बाहर खड़ी थी पुलिस की जीप

इसके बाद टोल से वापस खेरेश्वर तक आने पर कुलवा के बाहर ढाबे पर एक पुलिस जीप जरूर खड़ी दिखी। जिसमें सवार स्टाफ आराम फरमा रहा था। वापसी में ढाई बजे खेरेश्वर चौराहा का पुलिस बूथ व पुलिस चौकी तक पूरी तरह सन्नाटे में थे। कहीं एक सिपाही इस पूरे रास्ते में नहीं मिला।

ये हैं निर्देश
पुलिस सुरक्षा पर अगर बात करें तो हाईवे पर प्रतिदिन एक थाना प्रभारी या राजपत्रित अधिकारी की ड्यूटी इस बात की रहती है कि वह हाईवे को चेक करेगा। हर दिन यह रिपोर्ट देगा कि उसे कहां पुलिस मिली कहां नहीं मिली। मिलने पर पुलिस टीम का रिकार्ड दर्ज करेगा। दूसरा गभाना कट पर व दोरऊ मोड़ पर बैरियर लगाकर चेकिंग का प्रावधान है। इसके अलावा थाने के नाइट अफसरों को गश्त का निर्देश है। साथ में जगह-जगह पीआरवी व पिकेट ड्यूटी रहती है।

टोल लगा है तो ये सुविधाएं होना और सूचना अंकित होना जरूरी
-पर्याप्त लंबी दृष्टि रेखा, प्रमुख मार्ग परिवर्तन का स्थान
-टोल प्लाजा से नगरीय सीमा और बाईपास का फासला
-राज्य की सीमाएं और अन्य जांच चौकियों का स्थान
-इमरजेंसी के लिए पेट्रोल, एंबुलेंस, और क्रेन सेवा के नंबर
-टोल स्लिप पर दिए इमरजेंसी नंबर पर कॉल करके तुरंत मदद
-अगर 10 सेकंड से ज्यादा इंतजार तो टोल फ्री
-टोल प्लाजा पर वेटिंग लाइन 100 मीटर से ज़्यादा नहीं
-हाई पर सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं का ध्यान रखना
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