नौकरी की तलाश में जा रहे थे दोनों पड़ोसी
मृतक विनोद यादव के भतीजे आकाश ने बताया कि विनोद और राकेश दोनों गाजियाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी तलाशने जा रहे थे। वहां एक परिचित ने उन्हें एक कंपनी में इंटरव्यू के लिए बुलाया था। खुद को अनुभवी दिखाने के लिए दोनों अपनी-अपनी लाइसेंसी बंदूकें भी साथ लेकर जा रहे थे। विनोद अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
गोली की आवाज की आवाज सुन यात्रियों को लगा, फट गया टायर
अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर पहले तो यात्रियों को लगा कि बस का टायर फट गया है, लेकिन जब पास बैठे सहयात्रियों के कपड़ों और चेहरे पर खून के छींटे पड़े, तो हकीकत देखकर सबके होश उड़ गए। जान बचाने के लिए बच्चे सहम गए और लोग सीटों के नीचे छिपने लगे। कुछ ही मिनटों में सामान्य सफर खौफनाक मंजर में बदल गया।
तेज बारिश के चलते नहीं मिल सकी स्थानीय मदद
पैराई चौकी से दो किमी पहले जब यह हादसा हुआ, तब इलाके में तेज बारिश हो रही थी। हाईवे किनारे चाय की दुकान चलाने वाले एक युवक ने बताया कि दोपहर में तेज बारिश के कारण गोली चलने की आवाज तो आई, लेकिन लगा कि शायद बिजली कड़की है या टायर फटा है। बस भी सीधे चौकी की तरफ निकल गई, जिसके कारण मौके पर स्थानीय लोग मदद के लिए नहीं पहुंच पाए।
लाइसेंसी हथियारों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने सार्वजनिक वाहनों में लाइसेंसी हथियार लेकर यात्रा करने के नियमों और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, बंदूक में चार कारतूस भरे हुए थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्श पर रखी बंदूक में झटका लगने से ट्रिगर दब गया या मैकेनिज्म फेल हो गया। पुलिस अब हथियार की तकनीकी जांच (फोरेंसिक जांच) करा रही है कि क्या सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी।
कई कारण हो सकते हैं स्वत: गोली चलने के, होगी फॉरेंसिंक जांच
सिंगल बैरल रिपीटर बंदूक का बिना ट्रिगर दबाए अपने आप चल जाना एक बेहद गंभीर और खतरनाक स्थिति है। एसपी सिटी आदित्य बंसल कहते हैं कि अचानक बंदूक से गोली कैसे चली इसकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
हथियार की मैकेनिक्स के जानकार गन हाउस संचालक अमर सिंह कहते हैं कि यह सबसे आम कारण यह है कि जब आप रिपीटर बंदूक के मैकेनिज्म को पीछे खींचकर आगे छोड़ते हैं ताकि अगली गोली चैंबर में लोड हो सके, तो कभी-कभी बोल्ट बहुत तेजी से आगे बढ़ता है। यदि फायरिंग पिन में कचरा, सूखा तेल या कार्बन जमा हो गया है और वह अपनी जगह पर आगे की ओर ही फंस गई है, तो जैसे ही बोल्ट गोली को चैंबर में धकेलेगा, फायरिंग पिन बिना ट्रिगर दबाए ही गोली के प्राइमर से टकरा जाएगी और बंदूक चल जाएगी।
फायरिंग पिन को पीछे रखने वाला स्प्रिंग अगर टूट या कमजोर हो गया है, तो भी बोल्ट के झटके से पिन अपने आप आगे निकलकर गोली पर चोट कर देती है। इसके अलावा लंबे समय तक इस्तेमाल या गलत तरीके से की गई मॉडिफिकेशन के कारण अगर सीयर या हैमर के कोने घिस चुके हैं, तो वे आपस में सही से लॉक नहीं हो पाते। साथ ही बंदूक की नियमित सफाई न करना इस तरह के हादसों की सबसे बड़ी वजह है। पुराना ग्रीस, बारूद का कचरा और धूल मिलकर एक कड़ा पेस्ट बना लेते हैं, जो इंटरनल सेफ्टी मैकेनिज्म और फायरिंग पिन को उसकी सही जगह पर वापस लौटने से रोक देते हैं।