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अलीगढ़ः आगरा रूट पर रोडवेज बसों की किल्लत सीट के लिए यात्रियों में होती है मारामारी

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गांधीपार्क बस अड्डे पर बस में चढ़ने के लिए होती मारामारी। - फोटो : CITY OFFICE
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शहर से अन्य जनपदों तक जाने के लिए रेलवे के बाद दूसरे रोडवेज बसों का विकल्प अब यात्रियों के लिए आरामदायक की जगह दुखदायी होता जा रहा है। लगातार कम हो रहे स्टाफ और खराब हो रही बसों के चलते रूट पर बसों की किल्लत रहती है। आलम यह है कि सीट के लिए यात्रियों में मारामारी मची रहती है। लोग दरवाजे पर धक्कामुक्की करते हैं तो यात्री खिड़कियों से बस में चढ़ते हैं। इस बीच बसों के शीशे भी टूट जाते हैं, लेकिन यात्रियों की समस्या परिवहन निगम के अधिकारी भी हल नहीं कर पा रहे हैं।
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रविवार को कासगंज, एटा, फर्रुखाबाद, बदायूं, मुरादाबाद रूट पर यात्रियों के सापेक्ष रोडवेज बस काफी कम थीं। जबकि मथुरा-आगरा रूट पर तो बस न होने से सैकड़ों यात्री परेशान रहे। अलीगढ़ से लेकर हाथरस, सादाबाद तक लोग बसों का इंतजार करते रहे। घंटों तक इंतजार किया, कोई बस नहीं मिली तो लोगों ने डग्गेमार वाहनों से अपना सफर तय किया। आगरा रूट की बसों की हालत यह थी कि अगर गांधीपार्क बस अड्डे पर कोई बस आ जाए तो मधुमक्खियों की झुंड की तरह यात्री बसों में चढ़ने को आतुर रहते। बस जैसे-जैसे बस अड्डे पर रुकती तो भीड़ बस के साथ-साथ चलने लगती। दरवाजे से घुसने के लिए धक्कामुक्की हुई। अपने गंतव्य तक जाने की फिकर में कई यात्री तो खिड़कियों से घुसे। घंटों तक यही माहौल रहा। हालांकि अधिकारियों ने दो-तीन बसों का इंतजाम किया, लेकिन भीड़ छंटने में सुबह से लेकर दोपहर हो गई।
यह है प्रमुख समस्या
मंडल में कुल 658 बस संचालन के लिए विभिन्न डिपो को मिली हुई हैं, जबकि इनमें से 60 प्रतिशत 400 बस बमुश्किल चल पाती हैं। इसका प्रमुख कारण बसों का खराब होना और पर्याप्त स्टाफ का न आना भी है।
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हाथरस डिपो की 77 में से 46, अलीगढ़ डिपो की 115 में से 70, बुद्धविहार डिपो की 133 में से 80, नरौरा डिपो की 49 में से 30, कासगंज डिपो की 86 में से 51, एटा डिपो की 150 में से 90 और अतरौली डिपो की 48 में से 29 बस ही बमुश्किल संचालित हो पाती हैं। इनमें से कई बसें तो खराब रहती हैं। जिनमें स्टेयरिंग, सेल्फ, इंजन, पंप इंजेक्टर, कूलर, गेयर वॉक्स, एयर कंप्रेशर, सेल्फ, टायर, एयर कंप्रेशर जैसी तकनीकी खराबी रहती है। इस को लेकर अधिकतर संविदा चालक बस चलाने से परहेज करने लगे हैं। इस कारण पर्याप्त संख्या में रोडवेज बस वर्कशॉप से नहीं निकल पा रही हैं।
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