पुंगनूर नस्ल की गाय को दुलार करती दिविशा भारद्वाज।
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दक्षिण भारत की पुंगनूर नस्ल की छोटी गाय अब उत्तर भारत में भी लोगों की पसंद बनती जा रही है। अलीगढ़ शहर में भी इस अनोखी नस्ल की गाय को पालने की शुरुआत हो चुकी है। आकार में छोटी और देखने में आकर्षक होने के कारण यह गाय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।
यह खास नस्ल की गाय बहुत कम चारे में भी आसानी से जीवित रह सकती है और अपने औषधीय गुणों से भरपूर पौष्टिक दूध के लिए जानी जाती है। यह गाय प्रतिदिन लगभग दो से तीन लीटर तक दूध देती है।
शहर के हेमंत नगर निवासी डेविड भारद्वाज इस नस्ल की गाय और एक बछड़े को केरलम के कोट्टायम जिले के वेचुर गांव से लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि गाय और बछड़े को लाए हुए अभी करीब डेढ़ महीना ही हुआ है। इस गाय की ऊंचाई लगभग तीन से साढ़े तीन फीट होती है। डेविड भारद्वाज की बेटी दिविशा और बेटे पहल ने गाय-बछड़े का नाम राधा और गोपाल रखा है।
दोनों बच्चे पूरे दिन उनकी देखभाल में लगे रहते हैं। घर में इनके गले और पैरों में घुंघुरू बांधे गए हैं, जिनकी मधुर आवाज से पूरे घर में रौनक बनी रहती है। यहां तक कि इनके आराम के लिए घर में अलग से बिस्तर की भी व्यवस्था की गई है। डेविड ने बताया कि वह इनको केरल से तीन लाख 40 हजार रुपये में खरीदकर लाए हैं। इनके खानपान में सामान्य गायों की तरह ही भूसा और हरा चारा दिया जाता है। घर में राधा और गोपाल की देखभाल में पूरा परिवार जुटा हुआ है, जिसमें पिता हरिनंदन भारद्वाज, मां विमला देवी और पत्नी रितु शर्मा भी शामिल हैं।