इनकी निशानदेही से घटना में प्रयुक्त पिस्टल, चार कारतूस, मृत बॉबी की सोने की जंजीर, अभिषेक से मृतक बॉबी व मोहित के मोबाइल, खुद का मोबाइल व शिवम से दस हजार रुपये बरामद किए गए। घटना में हरीश ने हत्या करना स्वीकारा, जबकि अभिषेक व शिवम ने घटनास्थल पर पहुंचकर बाइक से उसे ले जाने में मदद की थी।
थाने में रोते रहे अभिषेक व शिवम
हरीश के साथ अभिषेक व शिवम को गिरफ्तार कर जब थाने लाया गया तो दोनों ने रोना शुरू किया। जेल जाते वक्त तक दोनों रोते रहे। दोनों के परिजन भी कोतवाली के बाहर बेहद दुखी थे। उनकी आंखों में भी आंसू नहीं रुक पा रहे थे। परिजनों की मानें तो हरीश शातिर अपराधी है। वह 25 दिसंबर को बाइक से दौरऊ आया था। तभी इंटर में पढ़ रहे दोनों युवकों को पार्टी कराने के नाम पर उदयपुर ले गया। जहां कार में बॉबी व मोहित के शव पड़े थे। धर्मेन्द्र व बौस प्रताप सिंह कार के बाहर खड़े थे। कार में लाश देख दोनों वहां से भाग खड़े हुए।