सिर के बाल और नाखून आसानी से निकल रहे थे। बाएं घुटने के थोड़ा नीचे फ्रैक्चर था। दोनों आंखों की पुतली के टिस्सू सूख गए थे। पेट पर काले सफेद धब्बे पड़ गए थे। बांई ओर से छाती के नीचे की पसलियां दिख रही थीं। डॉ. केके शर्मा के अनुसार बुरी तरह से मारने पीटने के कारण बच्ची की मौत सदमे से हो गई थी।
दूसरी ओर बाल आयोग ने ने मीडिया रिपोर्टिंग के लिए गाइडलाइन जारी की है। आयोग का कहना है कि मीडिया इस मामले की रिपोर्टिंग में थोड़ी सावधानी बरते। किसी भी तरह से बच्ची की पहचान बाहर नहीं आनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो यह एक दंडनीय अपराध होगा।