‘इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं’, ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए’, ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता’ आदि गीतों के जरिये लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले शहरयार की पुण्यतिथि आज (13 फरवरी) है। उर्दू के आधुनिक रचनाकार होने के नाते उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला। वह जितने अच्छे शायर थे, उतने ही अच्छे शिक्षक भी थे। रूमानी गजल के साथ व्यंग्य पर भी शहरयार की मजबूत पकड़ थी। उन्होंने अलीगढ़ के दंगे पर व्यंग्य करते यूं लिखा था ‘आग के शोलों से सारा शहर रोशन हो गया, हो मुबारक आरजू-ए-खार-ओ-खस पूरी हुई’। गीत से अपना मुरीद बनाने का हुनर भी शहरयार में था।
उर्दू साहित्य में शहरयार एक चमकता सितारा था। शहरयार उनका उपनाम था, जिससे पूरी दुनिया में जाने-पहचाने जाते थे। उनका असली नाम कुंवर अखलाक मोहम्मद खान था। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 16 जून 1936 को जन्मे शहरयार 13 फरवरी 2012 को दुनिया को अलविदा कह गए। वर्ष 1981 में बनी फिल्म उमराव जान में ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए’ लिखकर शहरयार ने काफी शोहरत बटोरी। वर्ष 2008 में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शहरयार को उर्दू अकादमी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, दिल्ली उर्दू पुरस्कार और फिराक सम्मान सहित कई पुरस्कार से मिले। शाज तमकनत की सलाह पर कुंवर अखलाक ने अपना साहित्यिक नाम ‘शहरयार’ रख लिया। 1965 में ‘इस्म-ए- आजम’ शीर्षक से उनका पहला संग्रह प्रकाशित हुआ। वर्ष 1961 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उर्दू विषय में एमए किया। वर्ष 1966 में इसी यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में प्रवक्ता, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष बने। बचपन में शहरयारअच्छे हॉकी खिलाड़ी व एथलीट भी थे।
शहरयार आधुनिक कविता के अहम हस्ताक्षर हैं। उनकी कविताएं संवेदनशीलता को प्रदर्शित करती हैं। आम बोलचाल की भाषा में कविता को कैसे आकर्षक और उत्तेजक बनाया जा सकता है, उन्होंने यह करके दिखाया। रोजमर्रा की चीजों को प्रभावित करने वाली चीजों को अपनी गजलों में रेखान्कित किया। ‘ख्वाब का दर बंद है’ कविता पर उन्हें साहित्य एकेडमी अवार्ड मिला। छोटी-छोटी कविताएं बहुत बड़ी कहानी बयां करती थी।
-प्रो. शाफे किदवई, मेंबर इंचार्ज, जनसंपर्क विभाग, एएमयू
शहरयार, जैसा नाम है उनका, वो पूरे शहर के यार थे। वो पहले ऐसे शिक्षक थे, जो अपने विद्यार्थियों, शिक्षकों, मित्रों से बड़ा प्रेम करते थे। मेरा यह सौभाग्य है कि जब मैं जनसंपर्क विभाग में प्रभारी रहा। इसलिए उनसे प्रतिदिन भेंट होती थी। शहरयार अच्छे व्यक्ति थे। वह अच्छे शायर थे। सबसे बड़ी बात, शहरयार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के गौरव थे। ऐसा व्यक्ति हमेशा याद आता है।
-डॉ. राहत अबरार, पूर्व निदेशक, उर्दू एकेडमी, एएमयू
प्रो शाफे किदवई- फोटो : CITY OFFICE
डॉ. राहत अबरार।- फोटो : CITY OFFICE