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शाहजमाल धरने पर पहुंचीं ऊपरकोट से हटाई महिलाएं

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शाहजमाल ईदगाह के बाहर धरने पर बैठी महिलाएं। - फोटो : CITY OFFICE
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रविवार को हुए उपद्रव के बाद ऊपरकोट इलाके से जबरन हटाई गई महिला आंदोलनकारियों ने शाहजमाल को अपना ठिकाना बना लिया है। यहां चल रहे धरने में शामिल होने के लिए सोमवार सायं बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंच गई। इसके चलते रविवार की घटना के बाद सोमवार दोपहर तक करीब 500 की संख्या में शाहजमाल में मौजूद महिलाओं की संख्या देर सायं तक बढ़कर हजारों में पहुंच गई। एएमयू छात्राओं के नेतृत्व में चल रहे धरने के दौरान आक्रोशित महिलाओं ने पुलिस के बजाय सरकार विरोधी नारे लगाए।
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जारी धरना प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया। दिल्ली में पथराव एवं फायरिंग की सूचना के बाद ऊपरकोट पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को निशाना बनाया। गुस्साई पुलिस ने इनके साथ ही ऊपरकोट में धरना दे रही महिलाओं को भी जबरन हटा दिया। पुलिस कार्रवाई एवं आरएएफ द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए प्रदर्शनकारी महिलाएं वहां से भाग गई। इस कार्रवाई का असर सोमवार को शाहजमाल में पिछले 28 दिनों से चल रहे धरना प्रदर्शन पर नजर आया।
सोमवार दोपहर तक यहां आंदोलनकारी महिलाओं की संख्या करीब 500 दिखाई दी। इससे दो दिनों से महिलाओं को हटाने के प्रयास में जुटे पुलिस एवं प्रशासन के अफसर राहत की सांस लेते नजर आए। लेकिन सायं होते होते महिलाओं की संख्या में एकाएक बढ़ोत्तरी हुई। ऊपरकोट से हटाई गई महिलाएं शाहजमाल पहुंच गई। देखते ही देखते धरना स्थल पर महिलाओं की संख्या 2500 को पार कर गई। इस दौरान मंच का संचालन एएमयू छात्राओं के हाथ ही रहा। खास बात यह रही कि आंदोलनकारी महिलाएं पुलिस के बजाय सरकार विरोधी नारे लगाती नजर आई।
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पुलिस का खौफ दिखाया धरना स्थल पर
शाहजमाल में धरने के दौरान रविवार की घटना से सबक लेते हुए पुलिस एवं प्रशासन का रुख बदल गया। धरनारत महिलाओं को हटाने के बजाय डराने की रणनीति पर अमल हुआ। फ्लैग मार्च हुआ तो रास्ते में मिले लोगों को डांट फटकार कर भगाने की कोशिश भी हुई। धरनारत महिलाओं को समझाने के प्रयास हुए तो कानून का भय भी दिखाकर आंदोलन से मार्ग से हटाने की कोशिश हुई। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह ने स्वीकार किया कि आंदोलनकारियों को अपनी बात कहने के लिए मौका दिया गया है। लेकिन कोई सामने नहीं आ रहा है।
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