कान्हा की पोशाक दिखातीं शबनम। स्रोत :स्वयं
हुनर ने धर्म और जाति की दीवारों से ऊपर उठकर शबनम को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। धनीपुर विकास खंड के जोरावर नगर निवासी शबनम भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप कान्हा जी और माता रानी की पोशाक सिलकर सालाना एक से सवा लाख रुपये तक का कमा रही हैं।
उनके हाथों से तैयार पोशाकों की मांग अलीगढ़ से लेकर मथुरा-वृंदावन तक पहुंच रही है। वह तीन से चार अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। शबनम ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत कान्हा जी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में वह घर पर छोटी सिलाई मशीन से पोशाकें तैयार करती थीं। धीरे-धीरे उनकी कारीगरी को पहचान मिलने लगी और उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। आज यह काम उनकी आजीविका का मजबूत जरिया बन गया है।
जन्माष्टमी, नवरात्रि समेत अन्य त्योहारों पर कान्हा जी और माता रानी की पोशाकों की मांग बढ़ जाती है। इसका लाभ शबनम को भी मिलता है। उनके उत्पाद अलीगढ़ के अलावा मथुरा के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं के बीच कान्हा जी की पोशाकों की मांग उनके कारोबार को विस्तार दे रही है।
शबनम ने अपने हुनर को केवल अपनी कमाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आसपास की तीन से चार महिलाओं को भी इस काम से जोड़ा है। एनआरएलएम के जिला प्रबंधक मो. असलम ने बताया कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाना है।