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गंभीर मरीज अस्पताल में, कम लक्षण वाले होंगे होम आइसोलेट

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सीएमओ डॉ. वीपी सिंह कल्याणी। - फोटो : CITY OFFICE
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अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के लिए बेड व ऑक्सीजन को सुलभ बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी डिस्चार्ज नीति में बदलाव किया है। अब लक्षण विहीन, शुरुआती लक्षण या हल्के लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेट किया जाएगा, लेकिन इसके लिए घर में अलग कमरा व शौचालय होना जरूरी है। वरना उन्हें अस्पतालों में रखा जाएगा। गंभीर मरीजों को अस्पताल में रखा जाएगा।
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सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि शासन द्वारा जारी मरीजों को नई डिस्चार्ज नीति के अनुसार यह व्यवस्था बनाई गई है। डिस्ट्रिक्ट सर्विलेंस अफसर डॉ. अनुपम भास्कर (डीटीओ) ने बताया कि होम आइसोलेशन शुरू होने से दस दिन तक इंटीग्रेटेड कोविड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिये फोन कर रोगियों में लक्षण विकसित होने के बारे में जानकारी ली जाएगी। सभी मरीजों से होम क्वारंटीन के दिशा-निर्देशों के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कराए जाएंगे।
होम आइसोलेशन से पहले होगी घर की जांच
कोविड से ग्रसित लक्षण विहीन रोगी को होम आइसोलेट करने से पहले उसके घर की जांच होगी। रैपिड रिस्पांस टीम घर पर जाकर होम आइसोलेशन की सारी पात्रता की जांच करेगी। हल्के रोगी को घर के अलग कमरे और शौचालय की व्यवस्था होने पर रखा जा सकता है।
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ये संक्रमित रह सकते एक साथ
आमतौर पर कोरोना संक्रमित व्यक्ति को अकेले ही आइसोलेट किया जाता है, लेकिन किसी परिवार में एक साथ अनेक लोग संक्रमित हो गए तो ऐसे में सभी एक कक्ष में रह सकते हैं। एक शौचालय का प्रयोग भी कर सकते हैं। होम आइसोलेशन प्रारंभ होने से दस दिन तक इंट्रीग्रेटेड कोविड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए फोन कर रोगियों में लक्षण के विकसित होने के संबंध में जानकारी ली जाएगी।
मरीज को अस्पताल किया जाएगा भर्ती
संक्रमित व्यक्ति में लक्षण नहीं दिख रहे हैं तो उसे होम आइसोलेशन में रखा जा सकता है, लेकिन रोगी के घर में अलग कमरा और शौचालय न होने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया जाएगा उसे एल-1 में रखा जाएगा।
इस बीच स्वास्थ्य कर्मी रोगी का तापमान, श्वसन दर, ऑक्सीजन की गति दिन में तीन बार नापेंगे। ऐसे मरीज को प्रारंभिक जांच के दसवें दिन या भर्ती होने के सातवें दिन बिना जांच के डिस्चार्ज किया जाएगा। रोगी को उसके बार घर में होम आइसोलेशन में सात दिन रहना होगा।
मध्यम तीव्रता श्रेणी वाले कोरोना मरीज रखे जाएंगे एल-टू या थ्री में
स्वास्थ्य विभाग ने मध्यम तीव्रता श्रेणी में उन मरीजों को रखा है, जिनमें लोअर रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन के लक्षण हो। खांसी, बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत, नेजल फ्लेयरिंग, पसली चलना, तेज सांस की परेशानी वाले मरीजों को एल-2 या एल-3 में भर्ती किया जाएगा। इलाज के बाद यदि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है और उसमें लक्षण भी प्रदर्शित नहीं हो रहे। ऐसे रोगी को जांच के बाद होम आइसोलेशन के लिए डिस्चार्ज किया जाएगा।
गंभीर रोगी होंगे अस्पताल में भर्ती
शासन द्वारा जारी कोरोना के मरीजों के लिए नई डिस्चार्ज नीति के अनुसार गंभीर संक्रमित मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। मरीज को ऑक्सीजन दिए जाने पर उसका ऑक्सीजन यथावत नहीं रख पा रहे, जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत है। उन्हें एल-टू या एल-थ्री में रखा जाएगा।
कैंसर, एचआईवी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट करवाने वाले संक्त्रस्मित व्यक्ति आईसीयू में भर्ती किया जाएगा। गंभीर रोगी की ऑक्सीजन सुविधा युक्त स्टेप डाउन वार्ड में शिफ्ट कर सकते हैं। रूम एयर पर ऑक्सीजन सेचुरेशन करने की स्थिति आने पर उपचार करने वाले चिकित्सक द्वारा जांच के बाद हालात नियंत्रण होने पर होम आइसोलेशन के लिए डिस्चार्ज भी किया जा सकता है।
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-सभी प्रकार के मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने के बाद कोविड अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि में पहने गए कपड़ों को विसंक्त्रस्मित कर दिया जाए।
-कपड़ों को गर्म पानी में सर्फ के साथ अच्छी तरह से धुलवाने के बाद ही प्रयोग करें।
-डिस्चार्ज होने के बाद मरीज का मोबाइल, जूते-चप्पल अन्य सभी सामग्री को एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर से साफ कर लें।
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