प्रोफेसर अब्दुर्रहीम के कहते हैं कि पीलेपन के साथ ही ताज की संगमरमर में क्षरण की भी समस्या देखी गई। यह वक्त के साथ होने वाली स्वाभाविक प्रक्रिया है। फोटो कैटेलिटिक नैनो मैटेरियल के प्रयोग से इसको भी रोका जा सकेगा।
गुंबद और मीनार का कई जगह से रंग बदला
इस प्रोजेक्ट में लगे वैज्ञानिकों का कहना है कि ताज का निर्माण 1632 में हुआ था। इसकी संगमरमर ने 393 वर्ष का सफर तय किया है। इस लंबी अवधि के दौरान गुंबद, मीनार आदि कई जगहों से संगमरमर का रंग बदल गया है। परीक्षण में उन हिस्सों को चिह्नित किया है। बाहरी दीवारों पर भी हवा का प्रभाव देखा गया है। यहां पर काम करने के लिए पुरातत्व विभाग भी सहयोग कर रहा है।