पब्लिक स्कूल डेव्लपमेंट सोसाइटी ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि जो सक्षम हैं, वे एक महीने के हिसाब से फीस का भुगतान कर दें तो स्कूल के कर्मचारियों और शिक्षकों को वेतन देने में प्रबंधन को आसानी होगी। जिले में छह सौ से ज्यादा निजी व वित्त विहीन स्कूल हैं। इनमें 72 सीबीएसई, आईसीएसई स्कूल हैं। इन स्कूलों में करीब 10 हजार से ज्यादा शिक्षक व कर्मचारी हैं, जिन्हें बच्चों की फीस से हर महीने तनख्वाह मिलती हैै। कोरोना वायरस के संक्रमण व लॉकडाउन के चलते अभिभावकों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ हो गई। ऐसे में इन शिक्षकों व कर्मचारियों के घरों में चूल्हा जलता रहे, इसके लिए सक्षम अभिभावकों से फीस जमा करने का आग्रह किया गया है। इस आग्रह पर अभिभावकों ने भी अपनी सहमति जता दी है।
इनका कहना है
जो इस समय फीस जमा करने के लिए सक्षम हैं, उनसे फीस जमा करने का अनुरोध किया गया है। अभिभावकों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया है। सरकारी सेवा में जो लोग हैं, उनकी सेलरी सरकार ने नहीं काटी है, तो वो फीस जमा करने में सक्षम हैं। दरअसल, इसी फीस के जरिये हजारों शिक्षक, कर्मचारियों की सेलरी मिलती है। ऐसे में कोई भी समझदार व संवेदनशील व्यक्ति इन शिक्षकों व कर्मचारियों के घरों में चूल्हा जलते देखना चाहेगा। अभिभावक यदि फीस देते हैं तो एक तरह से यह भी एक समाज सेवा होगा।
-डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी, उपाध्यक्ष पीएसडीएस
बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा जारी रहेगी। फीस के अभाव में उनके नाम नहीं काटे जाएंगे। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार महीनावार फीस जमा कर सकते हैं। हालांकि, उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। अभिभावक ऑनलाइन फीस जमा कर सकते हैं, उन्हें स्कूल भी आने की जरूरत नहीं है। अभिभावक जब फीस देंगे, तभी हजारों शिक्षकों व कर्मचारियों को तनख्वाह देने में आसानी होगी। ज्यादातर स्कूलों ने तय किया है कि ट्रांसपोर्टेशन का भाड़ा अभिभावकों से नहीं लिया जाएगा। जब बच्चों का स्कूल आना जान शुरू होगा, तभी ट्रांसपोर्टेशन भाड़ा लिया जाएगा।
-डॉ. राकेश नंदन, सचिव, पीएसडीएस
सक्षम अभिभावकों को फीस जमा करनी चाहिए, क्योंकि इसी फीस से स्कूल प्रशासन को अपने स्टाफ को सेलरी देनी होगी। इन लोगों के बारे में हम सभी को सोचना चाहिए। इनके भी परिवार और बच्चे हैं। रही बात अन्य अभिभावकों को फीस जमा करने के वक्त में रियायत देनी चाहिए।
-डॉ. अनिल पालीवाल, अभिभावक