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अलीगढ़ः जिले में 16 वर्षों में 25 प्रतिशत रह गया गन्ने का रकबा

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साथा चीनी मिल की जर्जर मशीनें। - फोटो : JAWAN
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आशीष श्रीवास्तव
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जर्जर हो चली साथा चीनी मिल के बमुश्किल चलने के कारण कभी गन्ना उत्पादन के मामले में अग्रणी जिलों में शुमार अलीगढ़ जिले में गन्ने का रकबा निरंतर घट रहा है। गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 16 वर्षों में गन्ने का रकबा पूर्व की तुलना में मात्र 25 फीसदी रह गया है। बताते चलें कि वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकबा जहां 22 हजार हेक्टेयर था, वह वर्ष 2021-22 में यह मात्र 4500 हेक्टेयर रह गया है। यदि मिल की नई यूनिट नहीं लगी तो कालांतर में जिला गन्नाविहीन हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
करीब 52 साल पुरानी साथा चीनी मिल की मशीनें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि इसका संचालन करना मुश्किल है। हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपया बहाया जाता है। इसके बाद भी मिल संचालन लड़खड़ा जाता है। इसके चलते पिछले पांच साल से जिले का गन्ना साबितगढ़ समेत अन्य मिलों को डायवर्ट करना पड़ता है। तमाम आंदोलन हो चुके हैं। बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह यह मुद्दा विधानसभा व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उठा चुके हैं। वहां से मिल की नई यूनिट लगाने का आश्वासन मिला था। प्रमुख सचिव ने मिल की नई यूनिट लगवाने के संबंध में पत्र भी जारी किया है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई न होने से गन्ना किसान निराश हैं। साथा चीनी मिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा.शैलेंद्र पाल सिंह ने बताया कि 12 दिसंबर को समिति की बैठक बुलाकर मिल की नई यूनिट लगवाने एवं पेराई सत्र के लगातार लेट होने के मामले में रणनीति बनाई जाएगी।
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- साथा चीनी मिल 20 से 25 दिसंबर तक चालू होने की संभावना है। चार पांच साल से मिल समुचित तरीके से न चलने के कारण किसान गन्ने की खेती से विमुख होता जा रहा है। इसके चलते गन्ने का रकबा कम हुआ है। वर्तमान में यह 4500 हेक्टेयर रह गया है।
डॉ. सुभाष यादव, जिला गन्ना अधिकारी
पिछले पांच वर्षों में घटता हुआ रकबा
- वर्ष 2017-18-9000 हेक्टेयर
- वर्ष 2018-19-7500 हेक्टेयर
- वर्ष 2019-20-6000 हेक्टेयर
- वर्ष 2020-21-5000 हेक्टेयर
- वर्ष 2021-21-4500 हेक्टेयर
पिछले पांच वर्षों में गन्ने का उत्पादन
- वर्ष 2017-18-72 लाख क्विंटल
- वर्ष 2018-19-60 लाख क्विंटल
- वर्ष 2019-20-48 लाख क्विंटल
- वर्ष 2020-21-40 लाख क्विंटल
- वर्ष 2021-22-36 लाख क्विंटल
जिले में स्थिति
साथा चीनी मिल की स्थापना-1969
- स्थापना के समय पेराई क्षमता-12500 क्विंटल प्रति दिन
- मरम्मत के बाद पेराई क्षमता-10000 क्ंिवटल प्रति दिन
- साथा मिल को आवंटित-950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना
- शेष गन्ना - साबितगढ़ मिल बुलंदशहर, न्यौली मिल कासगंज एवं अन्य मिलों में होगा स्थानांतरित
- गन्ने का कुल रकबा - 4500 हेक्टेयर
- कुल गन्ना किसान - नौ से दस हजार
- कुल उत्पादन - 36 लाख क्विंटल
- 20 से 25 दिसंबर के मध्य प्रस्तावित है मिल का संचालन
- उद्घाटन के बाद ऑनलाइन जनरेट होंगी पर्चियां
- कुल 15 क्रय केंद्र
एक माह की देरी से साथा मिल शुरू करने का दावा
साथा चीनी मिल में इस सीजन का पेराई सत्र करीब एक माह की देरी से 20 से 25 दिसंबर के मध्य शुरू हो सकता है। आमतौर पर चीनी मिलों में पेराई सत्र नवंबर के आखिर में शुरू होता है। शासन से आई 85 लाख की मरम्मत राशि से काम चल रहा है। बुधवार को एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल एवं जिला गन्ना अधिकारी डा.सुभाष यादव ने मिल का भ्रमण कर स्थिति देखी।
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श्री बालाजी साल्यूशंस कंपनी साथा चीनी मिल की मरम्मत का काम कर रही है। मिल के जीएम रामशंकर ने बताया कि अब तक टर्बाइन, मिड टर्बाइन, दो बॉयलर समेत अन्य काम पूरा हो चुका है। ब्वाइलिंग प्वाइंट व वाटर टनल का काम चल रहा है। कुछ अन्य काम बाकी हैं। यह सभी काम 20 अथवा 25 दिसंबर तक पूर्ण हो जाएंगे। इसके बाद गन्ने की पेराई शुरू करा दी जाएगी। पेराई सत्र के उद्घाटन के बाद किसानों की ऑन लाइन पर्चियां जेनरेट कर गन्ना खरीद शुरू करा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस बार मिल में दस हजार क्विंटल गन्ना प्रति दिन की क्षमता से पेराई की जाएगी।
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