गांव नौगवां स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर रहने वाले साधु नत्थू सिंह उर्फ रामदास (75) पुत्र सुखराम सिंह की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। लूट के इरादे से आए बदमाशों ने पहले साधु की पिटाई की, फिर उन्हीं के पीले रंग के चादर से गला घोंट दिया। इसके बाद मंदिर के पीछे टीनशेड पर उसी चादर से फंदा लगाकर शव को आग लगा दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। पुलिस ने तंत्र-मंत्र की भी आशंका जताई है।
बताते हैं कि शुक्रवार रात नत्थू सिंह मंदिर की दूसरी मंजिल पर सो रहे थे, तभी बदमाशों ने आवाज लगाकर जीने का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद बदमाश उनको रसोई में ले गए, जहां से गैस सिलिंडर व रुपये अपने कब्जे में ले लिए। विरोध पर बदमाशों ने उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद उन्हीं के पीले रंग के चादर से गला घोंट दिया। फिर मंदिर के पीछे टीनशेड के पाइप व पेड़ पर उसी चादर से फंदा लगाकर शव का बांध दिया और सिर के बालों में आग लगा दी। इसके बाद कुछ कबाड़ इकट्ठा कर शव को फूंकने की कोशिश की।
शनिवार सुबह वहां पहुंचे ग्रामीणों ने साधु का शव देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। भारतीय किसान सेना के प्रदेश अध्यक्ष रामऔतार यादव, देवेंद्र सिंह यादव व ग्राम प्रधान भोले यादव ने सीओ छर्रा शुभेंदु अधिकारी के पहुंचने पर ग्रामीणों को समझाया। जैसे ही पुलिस शव लेकर जाने लगी तो ग्रामीणों ने फिर रोक लिया। काफी देर समझाने के बाद ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जाने दिया।
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने भी मौका मुआयना किया और मृतक के बेटे से घटना की जानकारी ली। एसएसपी ने बताया कि हत्याकांड की कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है, खुलासे के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। मृतक के बेटे चंद्रकिशोर की तहरीर पर हत्या का मुकदमा अज्ञात में दर्ज किया गया है।
दस साल पहले छोड़ दिया था घर, बन गए थे साधु
ग्रामीणों का कहना है कि दादों थाना क्षेत्र के गांव नगला धीमर के मजरा शाहजहांपुर बैजना निवासी नत्थू सिंह उर्फ रामदास की पत्नी का 15 साल पहले निधन हो गया था। इसके बाद उनके तीन बेटों ने कुछ जमीन बेच दी थी। इस पर करीब दस साल पहले अपना घर व गांव छोड़कर साधु बन गए थे। कुछ साल तक वह गांव नगला हिमाचल स्थित महेकेश्वर देवता महाराज मंदिर पर रहे।
नौगवां के पूर्व प्रधान सुरेश यादव ने बताया कि प्राचीन शिव मंदिर में नत्थू सिंह पिछले पांच साल से रह रहे थे। उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। पूर्व प्रधान ने आशंका जताई है कि कहीं पहचान उजागर न हो, शायद इसलिए बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी है। उन्होंने बताया कि साधु बनने के बाद वह कभी अपने गांव नहीं लौटे। बताते हैं कि परिवार वाले कई बार उनको मनाने भी आए मगर वह हर बार मना कर देते थे। कभी घरवालों से न कुछ लेते थे और न कुछ देते थे।
तंत्र-मंत्र की आशंका, पुलिस कर रही कई बिंदुओं पर जांच
हत्याकांड को लेकर पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है, जिसमें तंत्र-मंत्र का भी एक बिंदु शामिल है। दरअसल, पहले साधु की हत्या की गई, फिर शव को जलाया गया। दूसरा बिंदु यह है कि इस वारदात को किसी परिचित ने अंजाम दिया है। साधु दो मंजिला मंदिर की ऊपरी मंजिल में रहते थे। नीचे जीने का दरवाजा बंदकर ऊपर सोने जाते थे। हत्यारों ने आवाज देकर दरवाजा खुलवाया होगा। फिर लूटपाट की होगी। पहचान उजागर न हो, इसलिए साधु की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके अलावा, साधु का एक भाई दिल्ली में रहता है। बताते हैं कि जमीन के पैसों को लेकर भी कुछ विवाद चल रहा है। फिलहाल पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर जांच कर रही है।