भागवत के इस प्रवास और गहन विचार मंथन से जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि संघ न केवल वर्तमान राजनीतिक सत्ता को बनाए रखना चाहता है, बल्कि उसका विस्तार भी करना चाहता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर नगर निकायों तक अपना नियंत्रण बरकरार रखना संघ की प्राथमिकता में शामिल है। माना जा रहा है कि पुराने स्वयंसेवकों के साथ यह संवाद इसी रणनीति को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अलीगढ़ प्रवास: हिंदुत्व के गढ़ और विपरीत विचारधारा के केंद्र के बीच समन्वय का प्रयास
मोहन भागवत का अलीगढ़ में पांच दिवसीय प्रवास कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह शहर न केवल चंद्रभान गुप्त, अशोक सिंघल और कल्याण सिंह जैसे हिंदुत्व को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं की जन्मभूमि रहा है, बल्कि यह एक बड़े क्षेत्र में व्यापक वैचारिक संदेश प्रसारित करने का केंद्र भी है। इसके अतिरिक्त, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ( एएमयू) भी यहीं स्थित है, जो मुस्लिम विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व प्रदान करता है।
भागवत का यहां विचार मंथन कार्यक्रम आयोजित करना एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। इसके माध्यम से वे यह जताना चाहते हैं कि उनकी विचारधारा के करीब होने के साथ-साथ, जहां एक विपरीत विचारधारा भी फलती-फूलती है, वह स्थान भी उनके लिए सहज और स्वीकार्य है। जानकारों का मानना है कि भागवत का यह प्रवास हिंदुत्व की विचारधारा को पोषित करने वाले इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने का प्रयास है। वहीं, एएमयू जैसे संस्थान की उपस्थिति के कारण, यह प्रवास एक ऐसे क्षेत्र में संवाद और समन्वय स्थापित करने का भी संकेत देता है जहां वैचारिक भिन्नता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रवास के दीर्घकालिक राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ क्या होते हैं।
संघ प्रमुख के प्रवास के अंतिम दिन थोड़ी चहलकदमी बढ़ी। शाम 4.15 बजे भागवत की गाडि़यों का काफिला निकला। मथुरा मार्ग से थोड़ा सा पहले कुछ ग्रामीण और व्यवस्था में लगे लोग दिखे। भागवत ने तुरंत हाथ जोड़ लिए। स्वयं सभी को प्रणाम किया, हल्का सा मुस्कुराएं और दिल्ली के लिए आगे बढ़ गए। भागवत की विनम्रता को देखकर हर कोई हैरत में था।
जाते समय व्यवस्थाओं को सराहा
अतिथि व्यवस्था में लगे स्वयंसेवकों का कहना था कि वह आम दिनों की तरह ही कार्य कर रहे थे। कहीं कोई भाग दौड़ और अतिरिक्त व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ी। सुरक्षा की दृष्टि से सिंघारपुर मार्ग को बंद कर दिया था। इसलिए गांव के लोग भी सोच रहे थे कि भागवत को देखना बहुत बड़ी बात है। मगर, सोमवार को शाम चार बजे के करीब जब उनके दिल्ली निकलने की तैयारी हुई तो सभी सतर्क हो गए। भागवत ने स्वयं व्यवस्था में लगे स्वयंसेवकों को बुलाया और सभी की प्रशंसा की। साथ ही व्यवस्थाओं को सराहा।
बच्चों से मिले, ग्रामीणों से किया नमस्कार
केशव सेवा धाम के छात्रावास में रह रहे पूर्वोत्तर राज्यों के बच्चों से भी बातचीत की। उनके रहने, घर जाने और माता पिता के बारे में भी हालचाल लिया। भागवत से मिलकर बच्चे काफी प्रसन्न दिखाई दिए। इससे पूर्व बैठक में भी कई बुजुर्ग संघ के कार्यकर्ताओं का कुशलक्षेम भी लिया। प्रशासनिक अमले से एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ, कमिश्रर संगीता सिंह, डीएम संजीव रंजन, एसएसपी संजीव सुमन ने भी जाते समय अभिवादन किया। 4.15 बजे के करीब जब उनका काफिला बढ़ा तो कुछ ग्रामीण भी सड़क किनारे खड़े हो गए। भागवत ने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर प्रणाम किया। मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन स्वीकार किया।
बाल स्वयंसेवक के घर पर पहुंच कर भागवत का जलपान करना पंचनगरी में चर्चा का विषय रहा। लोगों में चर्चा है कि इतना बड़ा व्यक्तित्व होने के बाद भी भागवत बाल स्वयंसेवक विभोर के घर गए और उनके यहां परिवार से मिले। इसी प्रकार भागवत ने सनातन शाखा के स्वयंसेवकों से भी बहुत सहजता और सरलता से बातचीत की।
स्वच्छता प्रहरियों के कार्यों की सराहना
भागवत के प्रवास के बाद स्वच्छता में लगे स्वच्छता प्रहरियों का महाकुंभ का गंगा जल देकर स्वागत किया गया। सभी ने उनके कार्य की सराहना की। विभाग सह संघचालक ललित कुमार, विभाग प्रचारक गोविंद, प्रांत सेवा प्रमुख मदन लाल, विभाग कार्यवाह योगेश आर्य, महानगर प्रचारक विक्रांत ने स्वच्छता प्रहरियों की सेवा भावना की सराहना की। कार्यक्रम में अजीत, कन्हैया, सुनील, विक्की, अंकित, विजय, रामबाबू, सचिन दुर्गेश स्वच्छता प्रहरियों का अभिनंदन किया।
ये रहे व्यवस्थाओं में
सर्व प्रबंध प्रमुख योगेश आर्य, सह प्रमुख अजय सराफ, पंकज कुमार, भोजन आलोक दूध वाले, द्वितीय भोजनालय (सरसंघचालक आवास) विकास शर्मा, अधिकारी व्यवस्था लव कुमार, भरत लाल, यातायात हिमांशु शर्मा, रामअवतार शर्मा छोटू, अजय तोमर, दीपेन्द्र चौधरी, सुरक्षा मनोज सिंह, धर्मवीर सिंह, आवास डाक्टर सुनील चौहान, प्रधानाचार्य कुमुदेश, स्वागत कक्ष नवनीत कुमार, विमल वाष्र्णेय, कार्यालय व्यवस्था राजीव अल्फा, शिवशंकर सिंह, चिकित्सा डाक्टर जयंत शर्मा, डाक्टर अभय पचौरी, वैद्य उपेन्द्र सिंह, प्रचार मीडिया भूपेंद्र शर्मा, राज नारायण सिंह, बौद्धिक पांडाल प्रदीप पांडेय, वीरेंद्र, परिसर सज्जा डाक्टर सुरेन्द्र, चंद्र प्रकाश, डाक्टर निशा शर्मा, स्वच्छता पवन शर्मा, डाक्टर मनवीर तोमर सिंघारपुर वाले, आपूर्ति संदीप अग्रवाल, आशु, प्रेम पाल सिंह, जल व्यवस्था तरुण कुमार, महेश , विद्युत एवं साउंड नीरज कुमार, यतेंद्र सिंह प्रमुख रूप से थे।