अशियाना बनाना अब और महंगा हो गया है। छह प्रतिशत जीएसटी लगने से ईंटों के दाम में 300 से 500 रुपये (प्रति हजार ईंट) की वृद्धि हुई है। अभी तक जिले के ज्यादातर ईंट-भट्ठा स्वामी समाधान योजना के तहत एक प्रतिशत टैक्स देते थे। इसके अलावा, पांच प्रतिशत के स्लैब में आने वाले भट्ठा कारोबारियों को अब 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। जिले में 450 ईंट-भट्ठा हैं।
एक मई से सरकार ने ईंट-भट्ठा कारोबार के जीएसटी स्लैब में बदलाव किया है। जीएसटी स्लैब में बदलाव होने से प्रति हजार ईंट पर लोगों को 300 से 500 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे। ईंट भट्ठा स्वामी प्रेम प्रताप सिंह ने बताया कि एक मई से ईंट के दामों में इजाफा हो गया है। पहले पांच हजार ईंटों की एक ट्रॉली 26 हजार रुपये की थी, जो अब डेढ़ हजार रुपये बढ़कर साढ़े 27 हजार रुपये की हो गई है। भवन निर्माण सामग्री कारोबारी अंकित बंसल ने बताया कि बीते दिनों ईंटों के दाम में करीब 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। महंगाई के कारण अन्य भवन निर्माण सामग्री के दाम में भी वृद्धि की आशंका है।
कोयला संकट से कारोबारी परेशान
ईंट कारोबार में अचानक आग लगने का कारण कोयला संकट भी है। भट्ठा स्वामियों का कहना है कि देश भर में कोयले का संकट है। मांग के सापेक्ष कोयला कम मिल रहा है। मांग बढ़ने से कोयला की कीमत में दोगुने का अंतर आ गया है। पहले एक टन कोयला 12 हजार रुपये में आता था। अब कोयला 24 हजार रुपये प्रति टन आ रहा है जिसकी गुणवत्ता भी पहले जैसी नहीं है।