नवरात्रि पर माता की चौकी के पास नवग्रह बनाने के लिए जब किराने से दालों की छोटी-छोटी पुड़िया ली गईं तो लगा मानों दालों में आग लग गई है। देखते ही देखते ही अरहर की दाल सभी रिकार्ड तोड़ते हुए 200 रुपये किलो तक पहुंच गई। एक महीने में ही अरहर की दाल ने सेब, अंगूर, चिकन, मटन सबको पटकनी मार दी। हाहाकार मची तो केंद्र सरकार की नींद टूटी। अब जाकर कहीं अरहर की दाल की कीमतों पर लगाम कस पाई है।
फुटकर में 185 से 205 रुपये किलो तक बिकी अरहर की दाल सोमवार को 165 से 170 रुपये किलो के भाव में आ गई। महावीरगंज में शुक्रवार को 180 रुपये किलो तक बिकी अरहर की दाल सोमवार को 165 रुपये किलो तक आ गई। कारोबारियों की मानें तो अगर केंद्र सरकार और जिला प्रशासन एक साथ कार्रवाई करें तो कीमतें एक सप्ताह में 140 रुपये किलो तक आ जाएंगी। दरअसल, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बढ़े आढ़ती, निर्यातकों और नामीगिरामी कंपनियों के स्टाक चेक करने, नियम से ज्यादा भंडारण पर सख्त कार्रवाई करने का फरमान जारी कर दिया। जिसके बाद थोक से फुटकर तक लगातार कीमतें गिरीं। अब जिला प्रशासन ने भी स्टाक चेक कराने और रेटों में बहुत ज्यादा अंतर पर कार्रवाई का निर्देश दिया है, ताकि दाल के दलालों पर लगाम कसी जा सके। जिलाधिकारी डॉ. बलकार सिंह के निर्देश जिलापूर्ति अधिकारी ने इस संबंध में सोमवार को मीटिंग बुलाई है।