यह रोग सूत्रकृमि, मेलोइडोगाइन ग्रैमिनिकोला के कारण होता है। जब नर्सरी से ही सूत्रकृमि से प्रभावित पौध खेत में लगाई जाती है, तो धान की पूरी फसल में यह रोग आ जाता है। इसके कारण उपज में 28 से 35 फीसदी तक की हानि होती है।
रोग की रोकथाम व प्रबंधन
शोधकर्ता प्रो. मुजीबुर रहमान ने बताया कि रोग की रोकथाम के लिए फसल चक्र का प्रयोग करना चाहिए। कम से कम एक साल के लिए धान के स्थान पर बाजरा, मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन, मूली, चना आदि फसलें उगाएं। खेत में पानी भरा रखें। धान की फसल को हमेशा पानी में डुबोए रखें, जिससे सूत्रकृमि का प्रकोप कम हो। उन्होंने कहा कि एक किलोग्राम बीज का पांच ग्राम बायोपेस्टीसाइड से उपचार करें। इसी तरह एक किलोग्राम बीज का पांच ग्राम नैमाटीसाइड से उपचार करें।
जड़ों का ऐसे करें उपचार
रोपाई से पहले 10 ग्राम जैविक कीटनाशक को 10 लीटर पानी में डालें, फिर जड़ों को भिगाेएं या फ्लूओपाइराम/फ्लुएनसल्फोन 100 पीपीएम घोल में दो-छह घंटे तक डुबोकर रखें। रोपाई के 15 दिन बाद फ्लूओपाइराम का खेत में प्रयोग करें। ज्यादा प्रकोप होने पर दो बार (15-15 दिन बाद) में फ्लूओपाइराम का इस्तेमाल करें।