पार्टी हाईकमान के निर्देश थे कि मंडल अध्यक्षों के चयन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सहमति जरूर ली जाए। पैनल बनाने में मनमानी के आरोप लगने लगे। यह मामला पार्टी हाईकमान के पास पहुंच गया। मामला इतना बढ़ा कि जिले की चुनाव प्रक्रिया को ही स्थगित कर दिया गया।
भारतीय जनता पार्टी में गुटबाजी थम नहीं रही है। यही कारण है कि मंडल अध्यक्षों के चुनाव को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता एकराय नहीं हो पा रहे हैं और मंडल अध्यक्षों की घोषणा नहीं हो पा रही। इस कारण महानगर और जिला अध्यक्षों का चुनाव भी लटक गया है। बताया जा रहा है कि अब प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होने के बाद ही जिले में संगठन की चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी।
विज्ञापन
भाजपा में पहली बार मंडल अध्यक्षों की घोषणा प्रदेश स्तर से की गई है। इसके लिए चुनाव की तमाम कवायद की गई। चुनाव अधिकारियों के साथ कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इसी दौरान संगठन में गुटबाजी भी चरम पर हो गई। पार्टी हाईकमान के निर्देश थे कि मंडल अध्यक्षों के चयन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सहमति जरूर ली जाए। पैनल बनाने में मनमानी के आरोप लगने लगे। यह मामला पार्टी हाईकमान के पास पहुंच गया। मामला इतना बढ़ा कि जिले की चुनाव प्रक्रिया को ही स्थगित कर दिया गया।
जिले में 35 मंडल अध्यक्षों की घोषणा होनी है। चूंकि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए साठ फीसदी से अधिक जिलों में मंडल अध्यक्षों की घोषणा जरूरी थी। यह कोरम पूरा होने के बाद अलीगढ़ में अभी चुनाव न कराने का निर्णय लिया गया। इसी कारण महानगर और जिला अध्यक्षों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई।
पार्टी में संगठन के चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। अभी पार्टी नेतृत्व से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है। जो भी निर्देश होगा उसका पालन किया जाएगा।- कृष्ण पाल सिंह लाला, जिलाध्यक्ष भाजपा