सजा सुनाए जाने के बाद सेवानिवृत फौजी मनोज कुमार
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11 साल पहले सेवानिवृत फौजी ने अपनी पत्नी-बेटे और पड़ोसिन की गोली मार कर हत्या कर दी थी। बेटी को भी गोली मारी, पर वह घायल हो गई। आरोपी पकड़ लिया गया। अलीगढ़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीष कोर्ट नं 2 से तिहरे हत्याकांड के मामले में अभियुक्त मनोज कुमार पुत्र राजेंद्र पाल सिंह को मृत्यु दंड की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपए का अर्थदण्ड भी अदा करना होगा।
यह था मामला
आर्मी से सेवानिवृत मूल रूप से बुलंदशहर का रहने वाला मनोज कुमार होमगार्ड में नौकरी करता था। उसके पास लाइसेंसी रिवाल्वर व राइफल थी। वह बच्चों व पत्नी के साथ मारपीट करता था। उसकी पत्नी सीमा ने अपने भाई दिनेश कुमार व रिश्तेदारों को मारपीट के बारे में बताया। दिनेश कुमार 11 साल पहले 12 जुलाई 2014 को दोपह 2:30 बजे अपनी बहन सीमा से मिलने उसके घर पहुंचा तो उसने देखा कि केवल बिहार चौराहे पर भगदड़ मची हुई थी।
लोगों के जूते चप्पल इधर-उधर पड़े हुए थे। लोग चिल्ला कर भाग रहे थे कि मनोज फौजी ने कई लोगों को मार दिया। दिलीप कुमार जैसी ही बहन के दरवाजे पर पहुंचा तो देखा कि अभियुक्त मनोज ने अपनी 13 साल की बेटी को गोली मारी थी,जो घायल होकर कमरे के बाहर लगे नल के पास पड़ी थी। पड़ोसियों की मदद से अभियुक्त मनोज को मय हथियार मौके पर पकड़ और थाने ले जाया गया।
बेटी ने बताई बाप की क्रूरता की कहानी
13 वर्ष की बालिका ने होश आने पर बताया कि उसके पापा मनोज ने आलमारी से राइफल और रिवाल्वर निकाल कर उसकी मां सीमा के सीने पर गोली मारी। पड़ोस के कमरे में रह रही किराएदार शशि आंटी गोली की आवाज सुनकर कमरे की तरफ मां को बचाने आई तो शशि वाला आंटी के सिर में भी पापा ने गोली मार दी, जिससे उनका सिर फट गया और जमीन पर गिर गईं। छोटा भाई जो 6 वर्ष का था और कक्षा 3 में पढ़ता था। वह पापा को बहुत प्यार करता था। गोली की आवाज सुनकर डरकर बचने के लिए भाई पापा के पैरों से लिपट गया तो पापा ने उसके सिर के बीचों-बीच गोली मार दी। जिससे बेटा पापा के पैरों में लिपटकर ही मर गया। यह सब देखकर मैं वहां से भागी तो पापा ने मुझे भी जान से मारने के लिए गोली मारीख् जो मेरे चेहरे के दाहिने गाल पर लगी।