अलीगढ़। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अभी तक सीधे-सीधे दो धड़े नजर आ रहे हैं। मगर राष्ट्रीय लोकदल की भूमिका भी कमतर नहीं है। स्थिति यह है कि अगर दो दल बराबरी पर खड़े हैं तो रालोद किसी एक के साथ खड़ा होकर उसे मजबूती दे सकता है। यही वजह है कि रालोद पर दोनों दलों की नजर टिकी है। मगर रालोद ने सीधा-सीधा ऐलान कर दिया है कि वह बसपा का अध्यक्ष बनने से रोकेगा। इस दौरान अगर रालोद को बेहतर समर्थन मिलता है तो वह भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतार सकता हैं।
अब तक की तस्वीर पर गौर करें तो रालोद के सीधे तौर पर सुबोध सिंह की पत्नी बबिता सिंह, हरेंद्र सिंह, सुलेखा सिंह सहित पांच प्रत्याशी जीते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य ऐसे जीते हुए प्रत्याशी हैं जो रालोद के बड़े नेताओं के प्रभाव में हैं। इनके सहारे रालोद किसी की भी जीत हार का गणित बना बिगाड़ सकता है।
अभी रालोद के नेताओं में आपस में मंत्रणा का दौर जारी है। शीर्ष नेतृत्व को भी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। बसपा का विरोध करने का निर्णय इसलिए भी लिया गया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में एससी आरक्षित खैर व इगलास जाट बाहुल्य विधानसभा में भी बसपा ही उनके सामने नुकसानदेह पार्टी हो सकती है। इसलिए बसपा को कमजोर करके रखना रालोद की प्राथमिकता है।
इधर, बरौली में रालोद के खुद मौजूदा विधायक का विपक्षी दिग्गज ठा. जयवीर सिंह से सामना रहता है। साथ में कुछ ब्लाक प्रमुखी की सीटों को लेकर भी रालोद का पांच ब्लाक जवां, लोधा, चंडौस, खैर और धनीपुर पर समझौता होने जा रहा है। इसे लेकर रालोद के वरिष्ठ नेता व विधायक ठा. दलवीर सिंह से बात हुईं तो उनका कहना था कि हम पांच से कहीं अधिक सदस्य लेकर बैठे हैं। मंत्रणा जारी है।
पहली प्राथमिकता बसपा को हराने वाले के साथ खड़े होने की है। दूसरी प्राथमिकता अपना प्रयास कर पार्टी का ही अध्यक्ष लड़ाने की भी है। दोनों स्थितियों पर विचार चल रहा है।