सफेद चावल के इस काले कारोबार में शहर में एक मंडी कारोबारी और मेलरोज बाईपास क्षेत्र में एक बड़े गोदाम कारोबारी की भूमिका उभर कर आई है। फेरी वाले लाभार्थियों से चावल खरीदकर गोदामों में बेच देते हैं। यहां से चावल को बड़ी गाड़ियों में लोड करके दिल्ली-एनसीआर और कुछ आटा मिलों में भेजा जाता है।
विभाग के दायरे में नहीं चावल खरीदने वाले
जिला पूूर्ति अधिकारी अभिनव सिंह कहते हैं कि लाभार्थी के चावल बेचने और गली-गली खरीद रहे फेरीवालों की रोकथाम में जिला पूर्ति विभाग की कोई भूमिका नहीं है। यह खरीद फरोख्त मंडी परिषद के दायरे में आती है। विभाग इस प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने के लिए अब राशन की दुकानों पर अपील चस्पा करने जा राह है, जिसमें लिखा होगा कि लाभार्थी किसी झांसे लालच में न फंसें। यहां से मिल रहा चावल पौष्टिक है। इसे स्वयं प्रयोग करें। किसी दूसरे को न दें।
999 किलो तक खरीदने पर लाइसेंस की जरूरत नहीं
मंडी सचिव राम यादव कहते हैं कि 999 किलो तक फुटकर खरीद में किसी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं है। चावल का भंडारण कर बेचने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई हुई है। अब भी कहीं ऐसा मामला सामने आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।
घुन लगे गेहूं की आपूर्ति किए जाने के मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद कासिमपुर स्थित भारतीय खाद्य निगम के गोदाम को बंद कर दिया गया है। अब इस गोदाम का सारा माल डंप होगा। अगले हफ्ते राशन की दुकानों पर खाद्यान्न की आपूर्ति होनी है। यह आपूर्ति सूतमिल स्थित एफसीआई के गोदाम से होगी।
जिले की स्थिति
- जिले में कुल राशन की दुकानें - 1350
- कुल राशन कार्ड - 6.50 लाख
- अंत्योदय श्रेणी के राशन कार्ड - 25 हजार
- सामान्य श्रेणी के राशन कार्ड लाभार्थी को - प्रति यूनिट 2 किलो गेहूं तीन किलो चावल
- अंत्योदय श्रेणी के राशन कार्ड लाभार्थी को - प्रति यूनिट 15 किलो गेहूं 20 किलो चावल
- सामान्य श्रेणी में मिलने वाला कुल चावल - 10 हजार मीट्रिक टन
- अंत्योदय श्रेणी में मिलने वाला कुल चावल- 2500 मीट्रिक टन