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AMU: 27 साल बाद अपने पुराने जेएनएमसी को देख भर आईं मेडिकल स्टूडेंट्स की आंखें, रीयूनियन में हुए रूबरू

Mon, 26 Dec 2022 08:16 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में ‘रूबरू‘ के तहत आयोजित ‘रीयूनियन‘ में एमबीबीएस 1995 बैच के छात्र एकत्र हुए। एक दूसरे से मिलकर सभी ने पुरानी यादें ताजा कीं।
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एएमयू के जेएनएमसी में रूबरू के तहत रीयूनियन कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से 27 साल के लंबे अंतराल के बाद स्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले 1995 बैच के एमबीबीएस छात्र एक बार फिर एकत्र हुए और पुराने दिनों को याद कर आंख भर आईं। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और भारत समेत दुनिया के अन्य हिस्सों से रूबरू के तहत आयोजित रीयूनियन में शामिल हुए।

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एएमयू के कुलपति प्रो तारिक मंसूर ने कहा कि 1995 के बाद से लेकर पिछले 27 वर्षों में जेएन मेडिकल कालिज में बहुत कुछ बदल गया है। यहां आपके अल्मा मेटर में नए विभाग और नए कोर्स शुरू हुए हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ है। एमबीबीएस 1995 बैच के छात्र ब्रांड एंबेसडर के रूप में दुनिया भर में अपने अल्मा मेटर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

प्रो-वाइस चांसलर प्रो मुहम्मद गुलरेज़ ने कहा कि पुरानी यादें हमें एक ही समय में हंसाती और रुलाती हैं। निश्चित रूप से आप सभी का यहाँ गहरा संबंध है, आपके दिल यहाँ हैं, और घर वह है जहाँ दिल है।
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फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन, प्रोफेसर एम.यू रब्बानी ने कहा कि “हालांकि इन छात्रों को अपनी संस्था को छोड़े एक लंबा समय हो गया है, लेकिन आपके चेहरे अभी भी ताजा हैं। हम यह देखकर खुश हैं कि आप सभी ने करियर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। एमबीबीएस 1995 बैच जेएनएमसी के गौरवशाली अतीत का एक अभिन्न हिस्सा है और इस बैच के छात्रों ने स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सेवाओं में अपनी सफलता की कहानी रची है। मातृ संस्था के लिए उनकी सेवाएं अमूल्य हैं।‘

जेएन मेडिकल के प्रिंसिपल प्रो राकेश भार्गव ने कहा कि यह एक अद्भुत क्षण है। एमबीबीएस 1995 बैच के छात्रों के लिए अपने सहपाठियों, दोस्तों और शिक्षकों से मिलने और जीवन की पुरानी यादों को ताजा करने का एक मंच है। यह वर्तमान छात्रों के लिए पूर्व छात्रों की सफलता की कहानियां सुनने का अवसर भी है। जेएनएमसी के बाल रोग विभाग की डा उजमा फिरदौस ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो, जब 1995 में हम जेएनएमसी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों से मिले और उत्साह के साथ प्रवेश किया। हममें से कुछ लोगों के लिए चीजें आज भी वैसी ही हैं। 

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