आशीष निगम, अलीगढ़।
बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास हो या फिर परिवहन। मोबाइल का नेटवर्क हो या इंटरनेट की गति। सब कुछ कम पड़ता जा रहा है, क्योंकि आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। हरेक काम के लिए लाइन में इंतजार लगना पड़ रहा है। अगर आनलाइन काम करना है तो वहां भी यूजर की भारी भीड़ है और नेटवर्क भारी दबाव रहता है।
वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोरोना संक्रमण के चलते अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन पिछले तीन दशकों की औसत जनसंख्या वृद्धि का आकलन करें तो हर दशक में जिले की आबादी लगभग 5-6 लाख की तेज रफ्तार से बढ़ रही है। वर्ष 2011 में जिले की आबादी लगभग 37 लाख थी, जो वर्ष 2021 में अनुमानित तौर पर 43-44 लाख तक मानी जा रही है।
इस तरह से वर्ष 2031 तक हमारी कुल संख्या 50 लाख के पार पहुंचने वाली है। आबादी की इस तेजी को ध्यान में रखते हुए शहर के विस्तारीकरण की महायोजना 2021-2031 में अलीगढ़-पलवल हाईवे, भदेसी रेलवे का यार्ड, कानपुर की ओर जीटी रोड, रामघाट रोड पर तालानगरी की ओर, आगरा रोड, मथुरा रोड, मुरादाबाद रोड, अनूपशहर रोड पर नई बसावट की डिजाइनें बन रही हैं। इस महायोजना के लागू होने से पूर्व भी शहर इन इलाकों की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कस्बों का विस्तार जारी है।
1-1921 में 10.42 लाख
2-1931 में 11.72 लाख
3-1941 में 13.73 लाख
4-1951 में 15.43 लाख
5-1961 में 17.65 लाख
6-1971 में 21.12 लाख
7-1981 में 25.75 लाख
8-1991 में 24.49 लाख
9-2001 में 29.92 लाख
10-2011 में 36.73 लाख
कहां कितनी है आबादी
तकरीबन 3650 वर्ग किलोमीटर में फैले जिले की कुल जनसंख्या वर्ष 2011 की गणना के अनुसार 3673889 है। जिसमें 1951996 पुुरुष और 1721893 महिलाएं हैं। शहरी इलाके में 1275289, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 2398600 लोग रह रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 674040 पुरुषों के सापेक्ष 601249 महिलाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 1277956 पुरुषों के साथ 1120644 महिलाएं निवास कर रही हैं। कुल परिवारों की संख्या 611371 है, जो लगभग 528018 आवासों में रहते हैं। शहर में 182532 और ग्रामीण क्षेत्रों में 345486 मकान हैं। शहर में परिवारों की संख्या 213983 और देहात में 397388 है।
जिले में यह है साक्षरता की स्थिति
1991 में कुल साक्षरता दर 45.2 प्रतिशत थी, जिसमें 60.2 प्रतिशत पुरुष और 27.2 प्रतिशत महिलाएं साक्षर थीं।
2001 में कुल साक्षरता दर 58.5 प्रतिशत थी, जिसमें 71.7 प्रतिशत पुरुष और 43 प्रतिशत महिलाएं साक्षर थीं।
2011 में कुल साक्षरता दर 67.5 प्रतिशत थी, जिसमें 78 फीसदी पुरुष और 55.7 प्रतिशत महिलाएं साक्षर थीं।
जिले में आबादी का असर
1- वर्ष 2020-21 में संस्थागत प्रसव की संख्या 60294 तक पहुंच गई है। इसमें घरेलू प्रसव मिला दें तो ये आंकड़ा 90 हजार के आसपास तक पहुंचता है।
2- जिले में शिशु जन्मदर 75 फीसदी प्रति हजार से घटकर 55 फीसदी पर आ गई है, लेकिन गर्भधारण के राष्ट्रीय औसत 2 के मुकाबले अलीगढ़ का औसत 3.1 है।
3- 4.5 फीसदी आबादी मजदूर है। ढाई फीसदी किसान हैं। डेढ़ फीसदी लोग खेतों में मजदूर हैं। महज आधा फीसदी लोग बेहतर आमदनी वाले हैं।
4- वर्ष 2011 में रोजाना साढ़े चार हजार मुसाफिर ट्रेन का टिकट कटवाते थे, 2019 में ये संख्या करीब 10 हजार तक पहुंच गई।
5-11 रेलवे हॉल्ट और स्टेशन के साथ 196 बस स्टॉप/ स्टैंड बन चुके हैं, जिसमें सुबह से शाम तक हजारों मुसाफिरों का आवागमन है।
6- बीते दस वर्ष में तीन नये थाने और 60 नई पुलिस चौकियां बन चुकी हैं। इसके बाद भी फरियादियों को महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
7- वर्ष 2013 में जिले की सड़कों की कुल लंबाई 3635 किमी थी, जो वर्ष 2020 तक पांच हजार किमी तक बढ़ चुकी है।
8- वर्ष 2011 में जिले में 8554 कामर्शियल और 447117 छोटे वाहन थे, अब इनकी संख्या क्रमश: 25511 और 806296 है।
9- एक दशक में सीबीएसई स्कूलों में छात्रों की संख्या 52 हजार से 80 हजार हो गई हैं। इस बीच 25 नए सीबीएसई स्कूल खुल चुके हैं।
10- एक दशक में आगरा विवि से संबद्ध डिग्री कॉलेजों में छात्रों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो चुकी है। वर्ष 2010 में जहां कॉलेजों में 15 हजार छात्र थे, वहीं अब इनकी संख्या 35 हजार है।
11- कोरोना टीकाकरण भी आबादी के आगे सुस्त है। लगभग 6.27 लाख को टीका लगा है, जिसमें 5.24 लाख को पहली डोज और लगभग एक लाख को दूसरी डोज लगी है।