जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर अब गंभीर रेफर मरीजों के साथ दिल्ली जाने से साफ मना कर दिया है। दरअसल एएमयू के छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारी को जब गंभीर स्थिति में दिल्ली रेफर किया जाता है तो एंबुलेंस में एनेस्थीशिया एवं संबंधित यूनिट के रेजीडेंट डॉक्टर को भेजा जाता रहा है। इन डॉक्टरों का कहना है कि यह व्यवस्था कुछ लोगों को खुश करने के लिए शुरू की गई थी। अब यह वीआईपी कल्चर खत्म होना चाहिए। उनके रुख से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन का टेंशन बढ़ गया है।
जेएन मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में तैनात एक इलेक्ट्रीशियन की पत्नी गंभीर रूप से बीमार है और मेडिसन यूनिट में भर्ती है। उसकी स्थिति को देखते हुए सीनियर डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए दिल्ली रेफर कर दिया है। उनके साथ रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. रेहान एवं डॉ. जैन को भेजा जा रहा था, लेकिन आरडीए (रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) उपाध्यक्ष डॉ. हम्जा एवं संयुक्त सचिव डॉ. अब्दुल्लाह ने इसका विरोध किया।
उनका कहना था कि किसी भी रेफर मरीज के साथ रेजीडेंट डॉक्टर दिल्ली नहीं जाएंगे। यदि रास्ते में उनके साथ कोई घटना होती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। आरडीए पदाधिकारियों के रुख के कारण काफी देर तक मरीज को दिल्ली भेजने में विलंब हुआ।
बाद में आरडीए पदाधिकारी यह कहकर तैयार हुए कि यह आखिरी बार है। इसके बाद कोई भी रेजीडेंट डॉक्टर रेफर मरीज के साथ नहीं जाएगा। हालांकि बाद में परिजनों ने मरीज की स्थिति कुछ बेहतर होने तक यहीं रहकर इंतजार करने का निर्णय लिया।
इस घटना के बाद एएमयू में खलबली मच गई है और बात वीसी, पीवीसी से लेकर प्रिंसिपल तक पहुंच गई है। आरडीए अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी ने बताया कि हम लोग वीआईपी कल्चर के खिलाफ हैं। कुछ लोगों को खुश करने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। जेएन मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक प्रो. एम हैरिस खान ने बताया कि आज अवकाश है। इस संबंध में जल्द ही बातचीत कर कोई निर्णय लिया जाएगा।