पीस मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार दया सिंह के धार्मिक ग्रंथ रामायण व गीता के संबंध में दिए गए विवादित बयान पर विभिन्न सामाजिक संगठनों में आक्रोश भड़क गया है।
न्याय संगठन के प्रमुख सरदार मुकेश सैनी एडवोकेट ने इस प्रकरण में दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की है। साथ ही आर्यवीर दल ने इस प्रकरण पर एक बैठक आयोजित की जिसमें दोनों नेताओं के बयान को धार्मिक ग्रंथों का अपमान बताया और इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करायी गई।
न्याय संस्था के प्रमुख सरदार मुकेश सैनी एडवोकेट ने बताया कि शुक्रवार को विधि विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं की एक बैठक हुई। उसमें पूरे प्रकरण को कानूनी पहलू से देखा गया। तय हुआ कि शनिवार को इस मामले में धारा 294(ए), 427, 506 और आर्टिकल 21 का उल्लंघन करने के मामले की रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी।
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। रामायण और गीता हजारों वर्षों से पूज्यनीय ग्रंथ हैं। इनके विषय में गलत टिप्पणी की गई है। दूसरी ओर अचल ताल स्थित आर्य समाज में जिला अधिवक्ता पूरनमल प्रजापति की अध्यक्षा में बैठक हुई जिसमें कहा गया कि दया सिंह को रामायण और महाभारत का ज्ञान नहीं है।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने सभी ऋषियों, संतों, श्रद्धालुओं का सम्मान किया था। बैठक में डॉ. खुशपाल आर्य, प्रशांत आर्य, सोनपाल गांधी, सचिन आर्य, दीपक आर्य आदि मौजूद थे।