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राहत : अब अस्पतालों को सीधे मिलेंगे रेमडेसिविर

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रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए भटक रहे लोगों के लिए ये राहत भरी खबर है। अब उनको सीएमओ कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सीधे अस्पतालों को ही इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। सीएमओ कार्यालय से दिए जाने वाले इंजेक्शन के बदले अस्पताल संचालकों को स्थिति सामान्य होने पर उन इंजेक्शन के बदले नए इंजेक्शन खरीदकर स्वास्थ्य विभाग को लौटाने होंगे।
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इसके अलावा, अगर स्वास्थ्य विभाग किसी निजी मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन दिलाता है तो संचालक को वह थोक दर पर मिलेगा, संचालक को इसका बिल मरीज को देना होगा। साथ ही उसी दर पर इंजेक्शन देना होगा, जिस दर पर स्वास्थ्य विभाग ने इंजेक्शन उपलब्ध कराया है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने ये नई व्यवस्था लागू की है। हालांकि, अभी तक इंजेक्शन की किल्लत खत्म नहीं हुई है। रविवार को सीएमओ कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा किया गया कि कार्यालय में इंजेक्शन नहीं है।
कोविड काल में लेकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के संबंध में कलक्ट्रेट सभागार में सांसद सतीश गौतम व डीएम चंद्रभूषण सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ निजी कोविड हॉस्पिटल संचालकों के साथ बैठक की।
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सांसद व डीएम ने कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर सीएमओ ऑफिस में भीड़ हो रही है, जिससे वहां कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ संक्रमण का भी खतरा है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मरीजों को सहूलियत प्रदान करने के लिए मरीजों को हॉस्पिटल से ही रेमडेसिविर इंजेक्शन प्राप्त होगा।
इसके लिए अस्पताल के चिकित्सक ये सुनिश्चित करेंगे कि किस मरीज को इंजेक्शन की आवश्यकता है। इसके लिए व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें रेमडेसिविर से जुड़े अधिकारी और निजी कोविड हॉस्पिटल के संचालक होंगे। इस ग्रुप का संचालन एसीएमओ डॉ. अनुपम भास्कर करेंगे। पर्यवेक्षण का जिम्मा एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल को सौंपा जाएगा।
ग्रुप में सुबह 11 बजे व दोपहर 3 बजे रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता का विवरण देना होगा। निर्धारित प्रारूप पर जानकारी देने के बाद इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। रेमडेसिविर का आवंटन अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या व जनपद में उपलब्ध कुल इंजेक्शन पर निर्भर होगी, जिन कोविड अस्पतालों को रेमडेसिविर आवंटित किया जाएगा, उसकी प्रत्येक दिन की सूची व इंजेक्शन की खाली वायल सीएमओ कार्यालय में जमा करानी होगी। इस मौके पर बैठक में सीडीओ अंकित खंडेलवाल, एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी, एडीएम वित्त एवं राजस्व विधान जायसवाल व निजी कोविड हॉस्पिटल के संचालक मौजूद रहे।
हॉस्पिटल संचालक नहीं कर सकेंगे घालमेल
जिलाधिकारी ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार निजी अस्पतालों को जो इंजेक्शन दिए जाएंगे, वह अस्पताल किस मरीज को उक्त इंजेक्शन को लगा रहे हैं, उसका नाम और इंजेक्शन की खाली वॉयल स्वास्थ्य विभाग में जमा कराएंगे। अगर, एक भी वायल कम हुई तो अस्पताल के संचालक के खिलाफ कार्रवाई होगी। ऐसा नहीं है कि किसी अन्य जनपद से खाली वॉयल को लगाकर उसे उपलब्ध करा दें, जो भरी वॉयल दी जाएंगी, उसका विवरण रखा जाएगा।
निशुल्क इंजेक्शन की व्यवस्था खत्म, तीमारदार पर पड़ेगा भार
जिला प्रशासन के नए फरमान से तीमारदारों को भागदौड़ में राहत जरूर मिली है। मगर, उनकी जेब ढीली होगी। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग कुछ दिनों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन निशुल्क तीमारदारों को उपलब्ध करा रहा था। मगर, अब स्वास्थ्य विभाग इंजेक्शन सीधे अस्पताल को देगा।
स्थिति सामान्य होने और बाजार में इंजेक्शन की भरपूर मात्रा उपलब्ध होने के बाद अस्पताल संचालकों से उतनी मात्रा में इंजेक्शन वापस लेगा। अगर इंजेक्शन मेडिकल स्टोर से दिलाया जाएगा तो उसकी थोक दर वसूली जाएगी। दोनों स्थितियों में अस्पताल संचालक को पहले पैसा देना होगा। इस पैसे को वह मरीज के इलाज के खर्च में शामिल करेगा। इस खर्च का सीधा बोझ तीमारदारों पर ही पड़ेगा।
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