कोरोना काल में पिछले दिनों मची ऑक्सीजन की मारामारी से अब राहत मिल गई है। जिले में अब प्रतिदिन की औसतन आठ टन मेडिकल ऑक्सीजन गैस की खपत रह गई है। अच्छी बात यह है कि अब भरपूर आपूर्ति मिलने से 48 घंटे से अधिक का बैकअप स्टॉक तैयार हो गया है। मंडल के अन्य जिलों में भी खपत घट गई है, जिसके चलते अलीगढ़ का भार कम हुआ है।
हाथरस, एटा और कासगंज के लिए रविवार को 50 सिलिंडर के करीब आपूर्ति की हुई। हालांकि अभी इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं की जा रही है। इस पर शासन स्तर से रोक लगी हुई है। सिर्फ मेडिकल उत्पादन बनाने वाली जिले की दो इकाइयों को ही आवश्यकता के अनुसार आपूर्ति की जा रही है।
कोरोना काल में 22 अप्रैल के बाद मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने के साथ गंभीर मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ। इनके उपचार के लिए ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई। आलम यह हुआ कि जिले में प्रत्येक दिन औसतन 5 टन मेडिकल ऑक्सीजन की खपत थी, जो कि बढ़कर 15 टन के पास पहुंच गई।
तीन गुनी हुई इस खपत के चलते प्रशासन के सामने मुसीबत आ गई। इसके बाद प्रशासन ने ऑक्सीजन का नियंत्रण अपने हाथ में लिया। कोविड अस्पतालों को प्राथमिकता के तौर पर सप्लाई दी गई। इसके एटा, कासगंज, हाथरस की भी आपूर्ति अलीगढ़ ने ही पूरी की। जिला औषधि निरीक्षक हेमेंद्र चौधरी ने बताया कि अब जिले के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
48 घंटे से अधिक का बैकअप है। इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए अभी गैस नहीं दी जा रही है। अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है, इसके चलते बैकअप को बढ़ाने पर जोर है। इधर, हेमेंद्र चौधरी ने बताया कि भारत सीरम कंपनी के मुंबई यूनिट को ब्लैक फंगस की दवा उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है। वहां से जवाब आया है कि वह सरकार को पहले आपूर्ति देंगे। इसके बाद निजी क्षेत्र में आपूर्ति करेंगे।
रेमडेसिविर इंजेक्शन के बदले देने को पैसे
औषधि निरीक्षक ने बताया कि कोरोना मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन के बदले में अब निजी कोविड अस्पतालों को इंजेक्शन नहीं बल्कि पैसों का भुगतान करना होगा। सरकारी दर के हिसाब से प्रति इंजेक्शन का भुगतान होगा। यह पैसा स्वास्थ्य विभाग में जमा होगा। पहले यह तय किया गया था कि इंजेक्शन के बदले निजी कोविड अस्पतालों को किल्लत खत्म होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को वापस इंजेक्शन ही उपलब्ध कराने होंगे।